
बेतिया, 23 अक्टूबर 2025।
बिहार में चुनावी रण छिड़ा है, आचार संहिता लागू है — फिर भी सत्ता पक्ष ने सरकारी योजनाओं की आड़ में खुलेआम प्रशासनिक मशीनरी को चुनावी प्रचार का औज़ार बना दिया है।मुख्यमंत्री गन्ना विकास योजना के नाम पर हरिनगर चीनी मिल के भितहा क्षेत्र के रुपही गांव में आयोजित गन्ना विकास गोष्ठी में सरकारी अफसरों की फौज मंच पर मौजूद रही।
कार्यक्रम में केवीके नरकटियागंज के वैज्ञानिक डॉ. अभिक पात्रा, गन्ना प्रसार अधिकारी मो. शाह रज़ा हुसैन, महाप्रबंधक गन्ना एम.एल. शर्मा, सहायक प्रबंधक विनय मिश्र समेत कई अधिकारी मौजूद रहे।
यह कार्यक्रम महज़ एक प्रशिक्षण शिविर नहीं था, बल्कि चुनावी लाभ के लिए रचा गया सरकारी तमाशा था — जिसमें लगभग 200 किसानों को बुलाकर प्रोत्साहन योजनाओं की बातें की गईं, बीज वितरण कराया गया और ‘सरकार की उपलब्धियों’ का बखान किया गया।विपक्ष ने इसे “लोकतंत्र की मर्यादा पर सीधा प्रहार” बताया है।
विपक्षी नेताओं का कहना है —“जब आचार संहिता लागू है, तब सरकारी मंच से इस तरह का कार्यक्रम सिर्फ सत्ता पक्ष को चुनावी फ़ायदा पहुँचाने के लिए कराया गया है। अधिकारी जनता की सेवा छोड़ सत्ताधारी दल के इशारों पर नाच रहे हैं। ये लोकतंत्र नहीं, प्रशासन का अपहरण है।”
विपक्ष ने चुनाव आयोग से तत्काल कार्रवाई, संबंधित अधिकारियों के निलंबन और कार्यक्रम की स्वतंत्र जांच की मांग की है।विपक्षी नेताओं ने चेताया —“अगर आयोग ने आँख मूँद ली, तो विपक्ष सड़कों पर उतरेगा और जनता के बीच जाकर इस तानाशाही को बेनकाब करेगा।”

