रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित डीएमएफ घोटाले में आरोपी व्यवसायी सूर्यकांत तिवारी को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिल गई है। कोर्ट ने जमानत की शर्तों में स्पष्ट किया है कि तिवारी को राज्य से बाहर रहना होगा। यह आदेश सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या की डबल बेंच ने सुनाया।
सुनवाई के दौरान सूर्यकांत तिवारी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी और शशांक मिश्रा ने पक्ष रखा। वहीं राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी और एडिशनल एडवोकेट जनरल विवेक शर्मा ने बहस की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने सशर्त जमानत मंजूर की।
इस घोटाले में आरोपी निलंबित IAS अधिकारी रानू साहू, समीर बिश्नोई और सौम्या चौरसिया को पहले ही हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी है, लेकिन सभी को छत्तीसगढ़ से बाहर रहने की शर्त पर राहत दी गई है।
डीएमएफ यानी जिला खनिज निधि, खनन से प्रभावित क्षेत्रों के विकास और प्रभावित लोगों के पुनर्वास के लिए स्थापित एक फंड है। लेकिन जांच एजेंसियों का आरोप है कि इस फंड का दुरुपयोग कर टेंडर में घोटाले और रिश्वत के जरिए करोड़ों की हेराफेरी की गई।

