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बहुचर्चित शराब घोटाला: विशेष कोर्ट में छठा अभियोग पत्र किया दाखिल, 248 करोड़ का नुकसान…!

रायपुर। बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने मंगलवार को रायपुर की विशेष अदालत में छठा अभियोग पत्र दाखिल किया। इस अभियोग पत्र में विदेशी शराब की सप्लाई पर कमीशनखोरी और लाइसेंसधारी कंपनियों की भूमिका का खुलासा किया गया है। एजेंसियों का कहना है कि इस खेल से राज्य सरकार को करीब 248 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ।

EOW-ACB की जांच के अनुसार, आबकारी विभाग में एक संगठित सिंडीकेट काम कर रहा था, जिसमें वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा, अरुणपति त्रिपाठी, निरंजन दास, कारोबारी अनवर ढेबर, विकास अग्रवाल और अरविंद सिंह शामिल थे।

  • सरकारी शराब दुकानों में बिकने वाली शराब की सप्लाई पर प्रति पेटी कमीशन लिया जाता था।

  • डिस्टिलरी से अतिरिक्त शराब बनवाकर दुकानों तक पहुंचाई जाती और उसकी अलग कमाई होती।

  • विदेशी शराब की सप्लाई के लिए भी समानांतर कमीशन व्यवस्था लागू की गई।

जब विदेशी शराब सप्लायर कंपनियां नकद कमीशन से बचने लगीं तो सिंडीकेट ने “एफएल-10ए/बी” लाइसेंस व्यवस्था लागू करवाई। राजनीतिक दबाव में 2020-21 में कैबिनेट से नई नीति को मंजूरी दिलाई गई। इसके बाद तीन निजी कंपनियों को सीधे लाइसेंस मिले और इन्हीं के जरिए विदेशी शराब सप्लाई का खेल चला।

  1. ओम साई ब्रेवरेज प्रा. लि. – विजय कुमार भाटिया का अप्रत्यक्ष नियंत्रण। कंपनी से 60% मुनाफा सिंडीकेट को और शेष हिस्से में से 52% लाभ भाटिया का। करीब 14 करोड़ रुपये की कमाई।

  2. नेक्सजेन पावर इंजिटेक प्रा. लि. – चार्टर्ड अकाउंटेंट संजय मिश्रा के नियंत्रण में। डमी डायरेक्टर बनाए गए। कंपनी ने कमीशन काटने के बाद भी 11 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया।

  3. दिशिता वेंचर्स प्रा. लि. – पुराने विदेशी शराब कारोबारी आशीष सौरभ केडिया की कंपनी।

शराब घोटाले की जांच में सामने आया कि पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा के संरक्षण में घोटाले को अंजाम दिया गया। उन्हें लगभग 64 करोड़ रुपये का लाभ मिला।

  • 15 जनवरी को ईडी ने लखमा को गिरफ्तार किया।

  • 21 जनवरी से वह न्यायिक रिमांड पर जेल में हैं।

  • अब तक इस मामले में 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और कई चार्जशीट कोर्ट में दाखिल हो चुकी हैं।

ईडी और EOW-ACB की संयुक्त जांच में खुलासा हुआ है कि आबकारी नीति में बदलाव और सिंडीकेट की मिलीभगत से यह घोटाला 3200 करोड़ रुपये तक पहुंचा। इसमें वरिष्ठ अफसरों, कारोबारियों और राजनीतिक रसूखदारों की मिलीभगत रही।

छठे अभियोग पत्र में ओम साई ब्रेवरेज से जुड़े विजय कुमार भाटिया, नेक्सजेन पावर इंजिटेक से जुड़े संजय मिश्रा, मनीष मिश्रा और अभिषेक सिंह को अभियुक्त बनाया गया है। ये सभी फिलहाल जेल में हैं।
अन्य कंपनियों और उनके संचालकों के खिलाफ अलग से अभियोग पत्र दाखिल करने की तैयारी है।

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