CG NEWS: छत्तीसगढ़ में अपनी 10-सूत्री मांगों, खासकर नियमितीकरण को लेकर हड़ताल पर बैठे लगभग 16,000 NHM कर्मचारियों पर सरकार ने सख़्ती दिखाना शुरू कर दिया है। 24 घंटे की चेतावनी के बाद भी काम पर नहीं लौटने पर अब बर्खास्तगी की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। बलौदाबाजार जिले में दो कर्मचारियों, हेमंत सिन्हा और कौशलेश तिवारी को बर्खास्त कर दिया गया है।
बर्खास्तगी के आदेश की कॉपी-

कर्मचारियों का अडिग रुख और आगे की रणनीति
कर्मचारी संघ के प्रांतीय सलाहकार, हेमंत सिन्हा, जिन्हें ख़ुद भी बर्खास्त किया गया है, ने इस कार्रवाई की निंदा की है। उन्होंने कहा कि सरकार मांगों को पूरा करने के बजाय कार्रवाई कर रही है। सिन्हा ने सवाल उठाया कि क्या सरकार सभी 16,000 कर्मचारियों को बर्खास्त करेगी?
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उन्होंने चेतावनी दी कि बर्खास्तगी की इस कार्रवाई से आंदोलन और ज़्यादा उग्र होगा। कर्मचारियों ने अब मंत्रियों और मुख्यमंत्री के आवास का घेराव करने का फ़ैसला किया है। सिन्हा ने कहा कि सभी कर्मचारी एकजुट हैं और अपनी मांगों पर अडिग हैं, और वे इस कार्रवाई से डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने सरकार से ‘मोदी की गारंटी’ को पूरा करते हुए नियमितीकरण का वादा निभाने की अपील की।

सरकार का पक्ष
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) द्वारा जारी किए गए आदेश के अनुसार, कर्मचारी 18 अगस्त 2025 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। आदेश में कहा गया है कि उनकी मांगों पर राज्य स्वास्थ्य समिति की कार्यकारी समिति में पहले ही निर्णय लिया जा चुका है।
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बर्खास्तगी आदेश में यह भी कहा गया है कि कर्मचारियों को काम पर लौटने के लिए नोटिस जारी किया गया था, लेकिन वे उपस्थित नहीं हुए। एक सितंबर को जारी किए गए दूसरे नोटिस में 24 घंटे के भीतर काम पर लौटने की चेतावनी दी गई थी, अन्यथा सेवा समाप्त करने की कार्रवाई की जाएगी। आदेश में इस कृत्य को लोकहित के विरुद्ध और कदाचार (misconduct) की श्रेणी में बताया गया है, जिसके बाद संविदा नियुक्ति तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई है।

