रायपुर: छत्तीसगढ़ कांग्रेस के जिलाध्यक्षों की बैठक में पूर्व मंत्री रविंद्र चौबे के एक हालिया बयान को लेकर विवाद खड़ा हो गया। इस बयान को अनुशासनहीनता बताते हुए कई नेताओं ने कार्रवाई की मांग की, जिसके बाद उनके खिलाफ सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया गया। इस घटना के बीच, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने सभी जिलाध्यक्षों को अपने “चमचों” से सावधान रहने की सलाह दी।
नेता प्रतिपक्ष की नसीहत
डॉ. महंत ने बैठक में कहा कि कई बार वरिष्ठ नेताओं के बयानों को उनके समर्थक या “चमचे” गलत तरीके से पेश करते हैं, जिससे बेवजह विवाद पैदा होता है। उन्होंने नेताओं से अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों को संयमित रहने की सलाह दी ताकि भविष्य में इस तरह के विवाद न हों। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग अपने फायदे के लिए कभी किसी को मुख्यमंत्री तो कभी किसी को प्रदेश अध्यक्ष घोषित कर देते हैं, जिससे पार्टी में भ्रम फैलता है।
क्या था पूरा मामला?
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के जन्मदिन पर रविंद्र चौबे ने कहा था कि “छत्तीसगढ़ की जनता आज भी भूपेश बघेल का नेतृत्व चाहती है।” इस बयान से पार्टी के भीतर काफ़ी हलचल मच गई थी।
विवाद बढ़ने के बाद चौबे ने तुरंत अपने बयान पर सफ़ाई दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा सामूहिक नेतृत्व में काम करती है और उनके बयान का गलत अर्थ निकाला गया। उन्होंने अपने इस बयान से यू-टर्न लेते हुए कहा कि पार्टी में नेतृत्व का निर्णय सामूहिक रूप से लिया जाता है।

