नई दिल्ली, 8 सितंबर 2025 – हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल पितृ पक्ष 8 सितंबर, सोमवार से शुरू होकर 21 सितंबर, रविवार को समाप्त होगा। इसे आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से लेकर अमावस्या तक मनाया जाता है। इस पखवाड़े में लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म करते हैं।
क्यों खास है पितृ पक्ष?
धार्मिक मान्यता है कि इस समय पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करने से घर-परिवार में सुख-समृद्धि आती है। पितृ दोष निवारण के लिए भी यह समय अत्यंत शुभ माना जाता है। पितरों के प्रति आस्था और कृतज्ञता व्यक्त करने का यह अवसर हर साल बड़ी श्रद्धा से मनाया जाता है।
पितरों की तिथि कैसे पहचानें?
किसी भी व्यक्ति का निधन जिस तिथि (पक्ष और तिथि) पर हुआ हो, उसी आधार पर पितृ पक्ष में उसका श्राद्ध किया जाता है।
उदाहरण के तौर पर – यदि किसी की मृत्यु 4 सितंबर 2025 को हुई और उस दिन भाद्रपद शुक्ल द्वादशी थी, तो पितृ पक्ष में हर साल कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि को उसका तर्पण-श्राद्ध होगा।
पितृ पक्ष 2025 की श्राद्ध तिथियां
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प्रतिपदा – 8 सितंबर (सोमवार)
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द्वितीया – 9 सितंबर (मंगलवार)
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तृतीया – 10 सितंबर (बुधवार)
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चतुर्थी – 10 सितंबर (बुधवार)
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पंचमी – 11 सितंबर (गुरुवार)
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षष्ठी – 12 सितंबर (शुक्रवार)
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सप्तमी – 13 सितंबर (शनिवार)
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अष्टमी – 14 सितंबर (रविवार)
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नवमी – 15 सितंबर (सोमवार)
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दशमी – 16 सितंबर (मंगलवार)
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एकादशी – 17 सितंबर (बुधवार)
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द्वादशी – 18 सितंबर (गुरुवार)
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त्रयोदशी – 19 सितंबर (शुक्रवार)
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चतुर्दशी – 20 सितंबर (शनिवार)
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अमावस्या (सर्वपितृ अमावस्या) – 21 सितंबर (रविवार)

