ग्राम कुर्रा: आजादी के 75 साल बीत चुके हैं, लेकिन जनपद पंचायत अभनपुर अंतर्गत खनन प्रभावित ग्राम कुर्रा अब भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। गाँव के पास खनन से करोड़ों की आमदनी होती है, पर ग्रामीणों को उसका एक प्रतिशत भी लाभ नहीं मिलता। यह स्थिति बताती है कि विकास के वादे केवल भाषणों और फ़ाइलों तक सीमित हैं।
खनन क्षेत्र, लेकिन सुविधाएँ शून्य
ग्राम कुर्रा में न उचित मूल्य दुकान का भवन है, न किसानों के लिए पक्का धरसा मार्ग। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए रंगमंच, सर्व समाज भवन, खेल स्टेडियम, सीसी रोड, नाली, सोलर हाई मास्क लाइट और यात्री प्रतीक्षालय जैसी बुनियादी सुविधाएँ आज भी सपना हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि इस विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस और भाजपा – दोनों दलों के विधायक और मंत्री चुने गए, लेकिन किसी ने गाँव की हालत सुधारने की कोशिश नहीं की। चुनाव के समय वादों की झड़ी लगती है, मगर नतीजे आने के बाद किसी जनप्रतिनिधि को गाँव की सुध नहीं रहती।
ग्रामीणों का गुस्सा फूटा
ग्रामीण भूपेश कुमार साहू ने कहा —
“खनन से करोड़ों की आमदनी होती है, लेकिन गाँव को उसका एक प्रतिशत भी नहीं मिलता। नेता और विभाग केवल फ़ाइलों में काम दिखाते हैं, ज़मीनी हकीकत शून्य है।”
ग्रामवासियों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो वे बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। ग्रामीणों का कहना है कि अब “खोखले आश्वासन” नहीं, बल्कि ठोस और दिखने वाला काम चाहिए।
13 साल पहले की घटना बनी थी सुर्खी — जब महिलाओं ने मिटाया ‘अभिशाप’
सालों पहले कुर्रा गाँव एक काले अध्याय के लिए बदनाम हुआ था — अवैध देह व्यापार। स्थिति इतनी भयावह थी कि गाँव की बेटियों के रिश्ते टूटने लगे। उस वक्त गाँव की महिलाओं ने तय किया कि इस अभिशाप को हमेशा के लिए खत्म कर देंगी। सरपंच ईश्वरीबाई साहू के नेतृत्व में ग्रामीण महिलाओं ने आंदोलन का रूप ले लिया। “देह व्यापार बंद करो” के नारों के बीच महिलाओं ने पाँच घरों में तोड़फोड़ और आगजनी कर दी। यह घटना रायपुर-पटेवा मार्ग पर घटित हुई, जिससे पूरा इलाका हिल गया।
उपसरपंच राम गिलहरे ने बताया था — “इस सड़क किनारे लंबे समय से यह कृत्य चल रहा था। कोशिशें हुईं, पर बंद नहीं हो पाया। अब गांव की इज़्जत और बेटियों के रिश्तों को बचाने के लिए महिलाओं ने कठोर कदम उठाया।” उस समय कुर्रा की नारी शक्ति ने पूरे क्षेत्र को संदेश दिया था कि अगर शासन और प्रशासन चुप है, तो जनता खुद न्याय करेगी।
अब फिर उबल रहा है जनाक्रोश
ग्राम कुर्रा के लोग कहते हैं कि देह व्यापार जैसी सामाजिक बुराई मिटाने की ताकत जब गाँव की महिलाओं ने दिखाई, तो अब विकास के लिए संघर्ष भी वे पूरी ताकत से करेंगे। आज गाँव फिर से सवाल पूछ रहा है — “खनन से करोड़ों निकलते हैं, तो गाँव के हिस्से में गरीबी क्यों?” “विकास के नक्शे पर कुर्रा कब दिखेगा?”
शासन-प्रशासन से ग्रामीणों की दो-टूक
ग्रामवासियों ने समाचार पत्र के माध्यम से शासन-प्रशासन को चेतावनी दी है कि अगर अब भी समस्याओं की अनदेखी जारी रही, तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे।
ग्रामवासियों की माँग है कि —
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उचित मूल्य दुकान व गोदाम भवन का निर्माण तुरंत किया जाए।
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NH-130C मार्ग पर सोलर लाइटें लगाई जाएँ।
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नाली, सीसी रोड और पेयजल टंकी का कार्य शीघ्र शुरू हो।
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अटल समरसता भवन और मिनी स्टेडियम का निर्माण हो।
ग्राम कुर्रा का सवाल – “रजत जयंती का जश्न या हमारी उपेक्षा का मज़ाक?”
जब पूरा छत्तीसगढ़ राज्य रजत जयंती के गौरव का उत्सव मना रहा है, तब कुर्रा जैसे गाँव राज्य के विकास मॉडल पर सवालिया निशान हैं। यह गाँव प्रशासनिक वादों की पोल खोलता है और यह याद दिलाता है कि विकास सिर्फ़ शहरों का हक नहीं, गाँवों का अधिकार है।
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