Durg Cyber Fraud : दुर्ग। साइबर अपराध के जाल को तोड़ने की दिशा में दुर्ग पुलिस ने एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। यह कार्रवाई उन 8 आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ हुई है, जो ठगी के पैसों को रखने के लिए अपने बैंक खातों को किराए पर दे रहे थे, जिन्हें ‘म्यूल अकाउंट’ कहा जाता है।
Durg Cyber Fraud : कैसे हुआ करोड़ों का फ्रॉड?
मामले का खुलासा तब हुआ जब गृह मंत्रालय के समन्वय पोर्टल से दुर्ग पुलिस को अलर्ट मिला। यह अलर्ट दुर्ग-भिलाई क्षेत्र के बंधन बैंक की सुपेला शाखा में खोले गए 27 खातों के बारे में था। जांच में पता चला कि इन खातों का इस्तेमाल साइबर धोखाधड़ी से अर्जित की गई अवैध राशि को जमा करने के लिए किया जा रहा था।
धोखाधड़ी की राशि: लगभग 1 करोड़ 20 लाख 57 हजार रुपये इन 27 खातों में जमा किए गए थे।
अपराध का तरीका: आरोपियों ने लालच में आकर या जानबूझकर अपने बैंक अकाउंट्स को ‘म्यूल अकाउंट’ (धोखाधड़ी के पैसों के लेनदेन के लिए इस्तेमाल होने वाला खाता) बनाकर साइबर ठगों को किराए पर दे दिया था। इन खातों से पैसों का बड़ा लेन-देन भी किया गया था।
पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारियां
अलर्ट मिलने के बाद, दुर्ग पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए फ्रॉड से जुड़े सभी 27 खातों को होल्ड करवा दिया। इसके बाद खाताधारकों के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तार किए गए 8 आरोपियों में भिलाई के ख़ुर्शीपार, सुपेला, सेक्टर 4 और दुर्ग के कई क्षेत्रों के निवासी शामिल हैं।
गिरफ्तार आरोपियों में शामिल हैं:
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रणजीत महानंद (रावणभाटा, सुपेला)
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प्रमिला जंघेल (खुर्सीपार)
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आकाश राव (सेक्टर 32)
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विपिन कुमार सिरसाम (रिसाली सेक्टर)
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मानवी बेरी (सेक्टर 5)
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आशीष गुप्ता (जुनवानी)
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पिंकी कुर्रे (कोहका)
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रमाकान्त बंसोड़ (सुपेला)
पुलिस ने इस गिरफ्तारी को साइबर अपराधियों के नेटवर्क पर एक बड़ी चोट बताया है और कहा है कि मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

