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Mahasamund Farmer Suicide Attempt : सिस्टम की मार! टोकन नहीं कटा तो निराश किसान ने ब्लेड से काटा खुद का गला, हालत गंभीर
Mahasamund Farmer Suicide Attempt : सिस्टम की मार! टोकन नहीं कटा तो निराश किसान ने ब्लेड से काटा खुद का गला, हालत गंभीर

 Mahasamund Farmer Suicide Attempt : महासमुंद: छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले से एक अत्यंत हृदय विदारक और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है, जिसने राज्य की धान खरीदी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। टोकन नहीं कटने से बुरी तरह हताश और परेशान 65 वर्षीय एक किसान ने अपनी ही एक एकड़ 40 डिसमिल कृषि भूमि के खेत में ब्लेड से खुद का गला काट लिया। किसान की हालत अत्यंत नाजुक बनी हुई है, और उन्हें बेहतर इलाज के लिए रायपुर रेफर करने की तैयारी चल रही है। यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना महासमुंद जिले के ग्राम सेनभाठा की है।

 Mahasamund Farmer Suicide Attempt : तीन दिनों से भटक रहा था किसान

जानकारी के मुताबिक, घायल किसान मनबोध गांडा (उम्र 65 वर्ष) पिछले तीन दिनों से अपनी धान की उपज बेचने के लिए टोकन कटवाने हेतु लगातार च्वाइस सेंटर के चक्कर लगा रहे थे। बार-बार प्रयास के बावजूद टोकन नहीं कट पाने के कारण किसान गहरे अवसाद और निराशा में चला गया।

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बताया जाता है कि शनिवार सुबह करीब 8 बजे मनबोध गांडा गाय चराने के बहाने घर से निकले थे। इसी दौरान, खेत में पहुँचकर उन्होंने हताशा में यह खौफनाक कदम उठा लिया।

घटना की जानकारी मिलते ही ग्रामीण और परिजन तत्काल मौके पर पहुँचे। गंभीर रूप से घायल मनबोध गांडा को तुरंत 112 एंबुलेंस की मदद से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बागबाहरा ले जाया गया। वहाँ प्राथमिक उपचार के बाद उनकी नाजुक स्थिति को देखते हुए उन्हें महासमुंद मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया, और अब आगे के उपचार के लिए रायपुर भेजा जा रहा है।

व्यवस्था पर उठे सवाल

यह घटना एक किसान की मजबूरी और सरकारी खरीदी प्रक्रिया में आ रही तकनीकी तथा प्रक्रियागत दिक्कतों को उजागर करती है। जिस किसान की जीविका पूरी तरह से धान की बिक्री पर निर्भर है, उसे केवल टोकन के लिए तीन दिनों तक भटकना पड़ा, जिससे अंततः उसे इतना बड़ा कदम उठाना पड़ा। प्रशासन को इस मामले की गहन जाँच करनी चाहिए कि टोकन कटवाने में विलंब क्यों हुआ और ऐसी कौन सी बाधाएं थीं जिसने किसान को इतना मजबूर कर दिया।

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