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Raipur Nagar Nigam : ट्रांसफर आदेश को ठेंगा : रायपुर निगम के 5 अनमोल रत्न दो महीने बाद भी डटे हुए…पढ़े पूरी खबर

Raipur Nagar Nigam
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Raipur Nagar Nigam : रायपुर: राजधानी रायपुर नगर निगम में इन दिनों सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के स्थानांतरण आदेश की खुलेआम अनदेखी का मामला गरमाया हुआ है। लगभग दो महीने पहले जारी हुई तबादला सूची को निगम के पांच वरिष्ठ अधिकारी-कर्मचारी पूरी तरह नज़रअंदाज़ कर चुके हैं और अपनी नई पदस्थापना पर जाने के बजाय रायपुर में ही डटे हुए हैं। इस खुली अवहेलना के कारण न केवल निगम के कोष पर दोहरे वेतन का अनावश्यक बोझ पड़ रहा है, बल्कि जिन अन्य निगमों (कोरबा, जगदलपुर, राजनांदगांव, रायगढ़) में इन्हें जाना था, वहाँ महत्वपूर्ण पद खाली पड़े हैं, जिससे जनता का काम बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

Raipur Nagar Nigam : ट्रांसफर के बावजूद रायपुर में जमे अधिकारी:

सूत्रों के मुताबिक, रवि लावण्य (ज़ोन स्वास्थ्य अधिकारी), संतोष वर्मा (राजस्व उपनिरीक्षक), रोशन देव रात्रे (उप अभियंता), उमेश नामदेव (जोन स्वास्थ्य अधिकारी), और प्रदीप यादव (कार्यपालन अभियंता) जैसे वरिष्ठ अधिकारी तबादले के दो महीने बाद भी रिलीव नहीं हुए हैं। यह सभी अधिकारी रायपुर में अपनी पहली पोस्टिंग से ही सालों से जमे हुए थे, और कुछ मामलों में तो इनकी जगह ट्रांसफर होकर आए नए कर्मचारी ज्वाइन भी कर चुके हैं।

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विपक्ष ने लगाया संरक्षण का आरोप:

इस गंभीर अनियमितता पर नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने सीधे तौर पर महापौर और कमिश्नर पर संरक्षण देने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा, “एक ही पद पर दो-दो लोग सैलरी कैसे लेंगे? नगर निगम पहले से ही दिवालिया होने की कगार पर है, ऐसे में जनता का पैसा इस तरह बर्बाद करना सरासर भ्रष्टाचार है।” उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि जिन निगमों में ये अधिकारी नहीं पहुँचे, वहाँ की जनता को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है, जो शासन-प्रशासन की विफलता को दर्शाता है।

प्रशासन की सफाई:

इस मामले में निगम कमिश्नर विश्वदीप ने कहा है कि तबादलों को लेकर शासन से मार्गदर्शन माँगा गया है, जबकि अपर आयुक्त कृष्णा खटीक ने स्वीकार किया कि खाली पदों के कारण रिलीविंग नहीं दी गई है और कुछ अधिकारी कोर्ट भी गए हैं। इन विरोधाभासी बयानों के बीच, कोरबा, जगदलपुर, रायगढ़ और राजनांदगांव की जनता सवाल उठा रही है कि उनके शहर के काम कब शुरू होंगे। अब देखना यह है कि राज्य शासन इस खुले आदेश की अवहेलना पर कब सख्ती दिखाता है।

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