Mahadev Satta App : दुर्ग, छत्तीसगढ़। महादेव सट्टा ऐप मामले में दुर्ग पुलिस ने अपनी कार्रवाई का दायरा बेहद तेज़ी से बढ़ा दिया है। अब तक इस विशाल नेटवर्क पर 70 प्राथमिकियाँ (FIR) दर्ज की जा चुकी हैं और लगभग 300 गिरफ्तारियाँ हो चुकी हैं। लेकिन, अब पुलिस ने इस सट्टा ऐप के नेटवर्क से किसी भी तरह जुड़े या लाभान्वित हुए लगभग तीन हजार संदिग्धों की एक व्यापक सूची तैयार की है।
Mahadev Satta App : रडार पर सरकारी अधिकारी, नेता और मीडियाकर्मी
दुर्ग पुलिस द्वारा तैयार की गई इस सूची में समाज के विभिन्न प्रभावशाली वर्गों के नाम शामिल हैं। जानकारी के मुताबिक, इस जांच के घेरे में प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस कर्मचारी, स्थानीय एवं प्रदेश स्तर के नेता और कुछ मीडियाकर्मी भी शामिल हैं।
दुर्ग एसएसपी विजय अग्रवाल ने इस बात की पुष्टि की है कि इन सभी संदिग्धों के खिलाफ साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। प्रमाण मिलते ही जल्द ही इन पर गिरफ्तारी, संपत्ति ज़ब्ती और आर्थिक अपराध के तहत विधिवत कार्रवाई की जाएगी। एसएसपी अग्रवाल ने साफ़ किया कि आरोपी चाहे किसी भी वर्ग या पद से आते हों, उनके खिलाफ पुख्ता सबूत मिलने पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
छोटे शहरों से दुबई तक फैला था नेटवर्क
जांच में यह बात सामने आई है कि इस सट्टा ऐप की पहुँच दुर्ग जिले के छोटे-छोटे गाँवों तक फैल चुकी थी। महादेव ऐप ने आकर्षक कमाई का झांसा देकर युवाओं को जोड़ा, जबकि कॉल सेंटरों और कस्टमर सपोर्ट एजेंटों के माध्यम से लाखों यूजर बनाए गए।
स्थानीय संचालक, जो रातोंरात लग्जरी वाहनों और संपत्तियों के मालिक बन गए थे, वे रोजाना करोड़ों रुपये डिजिटल माध्यमों से दुबई में बैठे मुख्य संचालकों सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल तक पहुँचा रहे थे। इस मामले को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान दुर्ग दौरे पर प्रमुखता से उठाया था।
पुलिस और EOW की समानांतर जांच
दुर्ग पुलिस ने छत्तीसगढ़ के भीतर और अन्य राज्यों में छापेमारी कर कई लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनके नेटवर्क सीधे दुर्ग से जुड़े थे। गिरफ्तार लोगों से मिले महत्वपूर्ण डेटा और बैंकिंग ट्रांजेक्शन की जानकारी के आधार पर ही यह 3000 संदिग्धों की नई सूची तैयार की गई है।
पहले गिरफ्तार किए गए प्रमुख व्यक्तियों में कई बड़े कारोबारी (जैसे अनिल दम्मानी, रोहित गुलाटी) और कुछ पुलिसकर्मी (जैसे चंद्रभूषण वर्मा, भीम सिंह) शामिल थे। इसके अलावा, ईओडब्ल्यू (EOW) की एफआईआर में पूर्व मुख्यमंत्री बघेल का नाम भी दर्ज है। अब सीबीआई और ईडी (CBI and ED) भी इस मामले की समानांतर (Parallel) जांच कर रहे हैं, जिससे आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।

