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CG Sharab Ghotala : चैतन्य बघेल की जमानत याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी, कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित

CG Sharab Ghotala
CG Sharab Ghotala

CG Sharab Ghotala : बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में जेल में बंद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की जमानत याचिका पर आज छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से चली विस्तृत बहस पूरी होने के बाद, जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की सिंगल बेंच ने मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

CG Sharab Ghotala : जमानत का आधार और ED का विरोध

जमानत के लिए याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि इस मामले की ट्रायल प्रक्रिया में देरी हो रही है, और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कथित शराब घोटाले में चैतन्य बघेल की कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं है। कोर्ट को बताया गया कि मामला केवल 4 अक्टूबर के एक बयान के आधार पर दर्ज किया गया, जिसमें 2 करोड़ रुपये के लेनदेन का जिक्र है। हालांकि, याचिकाकर्ता के वकील ने दावा किया कि इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि यह लेनदेन सीधे तौर पर शराब घोटाले से उत्पन्न हुआ था।

बहस पूरी होने के बाद, हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता और प्रतिवादी (ED) दोनों पक्षों को मामले से संबंधित अपने अंतिम लिखित सबमिशन (रिटर्न समिसन) प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। इसके बाद, कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया, जिसका अर्थ है कि फैसला अब कुछ दिनों बाद सुनाया जाएगा।

₹16.70 करोड़ के अवैध लेनदेन का आरोप

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने चैतन्य बघेल को उनके जन्मदिन के दिन, 18 जुलाई को भिलाई स्थित उनके निवास से धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत गिरफ्तार किया था। ED की जांच एसीबी/ईओडब्ल्यू रायपुर द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी।

ईडी की जांच में दावा किया गया है कि शराब घोटाले से उत्पन्न ₹16.70 करोड़ की अवैध राशि चैतन्य बघेल को प्राप्त हुई थी। ईडी का आरोप है कि उन्होंने इस पैसे का उपयोग अपनी रियल एस्टेट फर्मों में किया, जिसमें प्रोजेक्ट के ठेकेदारों को नकद भुगतान करना शामिल है। ईडी ने यह भी कहा कि चैतन्य बघेल ने त्रिलोक सिंह ढिल्लों के साथ मिलीभगत करके अपनी कंपनियों का उपयोग एक योजना के तहत किया, जिसके तहत उन्होंने ढिल्लों के कर्मचारियों के नाम पर अपने “विठ्ठलपुरम प्रोजेक्ट” में फ्लैटों की खरीद की आड़ में ₹5 करोड़ अप्रत्यक्ष रूप से प्राप्त किए।

इस घोटाले के कारण प्रदेश के खजाने को भारी नुकसान होने और करीब ₹2,500 करोड़ रुपये की अवैध कमाई (POC) घोटाले से जुड़े लाभार्थियों की जेब में पहुंचने का आरोप है।

इस मामले में चैतन्य बघेल के अलावा पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा, अरविंद सिंह, अनवर ढेबर, त्रिलोक सिंह ढिल्लों, ITS अरुण पति त्रिपाठी और विधायक कवासी लखमा सहित कई अन्य बड़े चेहरे भी जेल में बंद हैं।

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