CG News : कोरबा: छत्तीसगढ़ के ऊर्जाधानी कोरबा में इंदिरा नगर बस्ती के करीब 250 परिवारों के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल छा गए हैं। रेलवे द्वारा घर खाली करने के नोटिस और सोमवार को घरों पर लगाए गए लाल निशानों के बाद क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई है। अपनी छत बचाने की गुहार लेकर सैकड़ों की संख्या में बस्तीवासी, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल थीं, मंगलवार को शहर के मुख्य चौक (पवन टॉकिज फाटक) पर धरने पर बैठ गए। इस प्रदर्शन के कारण शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई और सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
CG News : लाल निशानों ने बढ़ाई धड़कनें, मुआवजे की मांग पर अड़े लोग
बस्तीवासियों का आक्रोश तब फूट पड़ा जब रेलवे अधिकारियों ने सोमवार को पुलिस बल के साथ पहुँचकर घरों को हटाने के लिए उन पर निशान लगाना शुरू कर दिया। इसके विरोध में सोमवार को स्टेशन परिसर में भी प्रदर्शन किया गया था। प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि वे दशकों से यहाँ रह रहे हैं और यदि रेलवे को विकास के लिए जमीन चाहिए, तो उन्हें बिना उचित मुआवजे और विस्थापन की व्यवस्था किए बेदखल न किया जाए। उनकी मांग है कि कार्रवाई से पहले शासन उन्हें रहने के लिए वैकल्पिक जगह उपलब्ध कराए।
प्रशासन के आश्वासन पर थमा चक्काजाम
मुख्य चौक पर जारी प्रदर्शन के दौरान स्थिति को संभालने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस के अधिकारी मौके पर पहुँचे। नायब तहसीलदार दीपक पटेल ने प्रदर्शनकारियों से ज्ञापन लिया और आश्वासन दिया कि फिलहाल कोई भी तोड़फोड़ की कार्रवाई नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि रेलवे को किसी भी कार्रवाई से पहले जिला प्रशासन को सूचित करना अनिवार्य होगा। वार्ड पार्षद तामेश अग्रवाल के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन को प्रशासन के ठोस आश्वासन के बाद समाप्त किया गया।
कलेक्ट्रेट घेराव की दी चेतावनी
हालांकि अभी आंदोलन शांत हो गया है, लेकिन बस्तीवासियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यह केवल एक अस्थायी विराम है। यदि जिला प्रशासन और रेलवे प्रबंधन ने मिलकर उनके विस्थापन और मुआवजे की नीति स्पष्ट नहीं की, तो आने वाले दिनों में कलेक्ट्रेट का घेराव किया जाएगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन उन्हें सड़क पर लाकर किया गया विकास उन्हें मंजूर नहीं है।

