RTE Admission Rule : रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत निजी स्कूलों में होने वाली प्रवेश प्रक्रिया में एक बड़ा बदलाव करने का निर्णय लिया है। नए नियमों के अनुसार, आगामी शैक्षणिक सत्र से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (BPL) के बच्चों को निजी स्कूलों की ‘एंट्री क्लास’ जैसे नर्सरी या केजी-1 में प्रवेश नहीं मिलेगा, बल्कि उन्हें सीधे कक्षा पहली में दाखिला दिया जाएगा। लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा भेजे गए इस प्रस्ताव को राज्य शासन ने अपनी प्रशासनिक स्वीकृति दे दी है। विभाग का तर्क है कि आरटीई की मूल धारा के प्रावधानों के तहत यह कदम उठाया गया है, जबकि अब तक चल रही प्री-प्राइमरी कक्षाओं में प्रवेश की व्यवस्था को समाप्त करने का निर्णय लिया गया है।
RTE Admission Rule : इस फैसले के बाद प्रदेश के निजी स्कूल संचालकों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने इस बदलाव का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि अधिकांश निजी स्कूलों में शिक्षा का ढांचा नर्सरी से शुरू होता है। यदि बीपीएल वर्ग के बच्चे सीधे पहली कक्षा में प्रवेश लेंगे, तो वे उन बच्चों की तुलना में पढ़ाई में पिछड़ जाएंगे जो पहले से दो-तीन साल की बुनियादी शिक्षा प्राप्त कर चुके होंगे। एसोसिएशन का मानना है कि इससे गरीब बच्चों पर मानसिक दबाव बढ़ेगा और स्कूल छोड़ने वाले बच्चों (ड्रॉपआउट) की संख्या में भी बढ़ोतरी हो सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार नर्सरी और केजी कक्षाओं की फीस का पैसा बचाने के उद्देश्य से बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है।
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इसके साथ ही, निजी स्कूलों की पुरानी मांगें भी फिर से गरमाने लगी हैं। बताया जा रहा है कि वर्ष 2011 के बाद से आरटीई के तहत दी जाने वाली प्रतिपूर्ति राशि (फीस) में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। वर्तमान में शासन द्वारा प्राथमिक स्तर के लिए 7 हजार, माध्यमिक के लिए 11.5 हजार और हाई स्कूल के लिए 15 हजार रुपये वार्षिक फीस निर्धारित है। स्कूल संचालकों का कहना है कि एक ओर लागत और महंगाई बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर शासन फीस बढ़ाने के बजाय प्रवेश के दायरे को सीमित कर रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर शासन और स्कूल प्रबंधकों के बीच टकराव बढ़ने की संभावना है।

