Wed. Dec 31st, 2025
Dhamtari News
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Dhamtari News : धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले से वन्यजीव प्रेमियों को झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। मगरलोड क्षेत्र के कोरगांव के जंगलों में एक तेंदुए की संदिग्ध अवस्था में लाश मिली है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि मृत तेंदुए के चारों पैरों के पंजे गायब हैं, जिससे इस मामले में ‘अंगों की तस्करी’ के लिए शिकार किए जाने की प्रबल आशंका जताई जा रही है।

Dhamtari News : जंगल सफारी से बुलाई गई स्पेशल टीम
तेंदुए के शव मिलने की सूचना जैसे ही वन विभाग को मिली, विभाग में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए फौरन जंगल सफारी रायपुर से ‘डॉग स्क्वायड’ और विशेषज्ञों की एक टीम को धमतरी रवाना किया गया। इस टीम ने सोमवार रात भर इलाके की घेराबंदी कर साक्ष्य जुटाए। शक के आधार पर स्थानीय चरवाहों और जंगल के आसपास रहने वाले ग्रामीणों से कड़ी पूछताछ की जा रही है।

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शाम के वक्त मिला शव, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार
जानकारी के अनुसार, मगरलोड के उत्तर सिंगपुर रेंज (कक्ष क्रमांक 23) में रविवार शाम करीब 4:45 बजे गश्त के दौरान तेंदुए का शव देखा गया था। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि तेंदुए का पोस्टमार्टम करवा लिया गया है। हालांकि, मौत की असली वजह और पंजे काटे जाने के पीछे का सच पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगा।

लगातार हो रही घटनाएं: कवर्धा में भी मिला था शव
छत्तीसगढ़ के जंगलों में तेंदुओं की सुरक्षा पर अब बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। गौरतलब है कि अभी कुछ दिन पहले (17 दिसंबर) को राजनांदगांव और कवर्धा के सीमावर्ती जंगलों में भी एक तेंदुए की सड़ी-गली लाश मिली थी। महज एक हफ्ते के भीतर दूसरे तेंदुए की मौत ने वन विभाग की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है।

खबर में क्या नया ऐड कर सकते हैं? (अतिरिक्त जानकारी)
1. अंगों की तस्करी का काला बाजार: जंगलों में तेंदुओं के पंजे, नाखून और दांतों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी मांग रहती है। तांत्रिक क्रियाओं और सजावटी सामानों के लिए शिकारी अक्सर जहर देकर या करंट लगाकर वन्यजीवों का शिकार करते हैं और फिर उनके नाखून व पंजे काटकर भाग जाते हैं। धमतरी का यह मामला भी इसी ओर इशारा कर रहा है।

2. वन विभाग की गश्त पर सवाल: इतने बड़े जानवर का शिकार होकर अंग गायब हो जाना बताता है कि जंगल में शिकारियों की आवाजाही बेखौफ जारी है। ग्रामीणों के अनुसार, अगर समय रहते गश्त बढ़ाई गई होती, तो शायद वन्यजीवों को सुरक्षित बचाया जा सकता था।

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