खैरागढ़। जब रक्षक ही सुस्त हो जाए, तो जनता का आक्रोश सड़कों पर उतर आता है। खैरागढ़ जिले के करमतरा गांव में एक मामूली मकान विवाद ने शुक्रवार की रात वो मंजर दिखाया, जिसने पूरे जिले की कानून-व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
दहशत की वो रात: जब हथियारों के साथ मिली धमकियां
ग्रामीणों के मुताबिक, विवाद काफी समय से सुलग रहा था, लेकिन बीती रात हद पार हो गई। आरोप है कि भूपत साहू और उसके साथियों ने खुलेआम धारदार हथियारों के साथ गांव में तांडव मचाया और लोगों को जान से मारने की धमकियां दीं। गांव की गलियों में फैले इस खौफ ने महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को घरों में दुबकने पर मजबूर कर दिया।
आधी रात को ‘रणक्षेत्र’ बना जालबांधा थाना
पुलिस की कथित ढिलाई से नाराज सैकड़ों ग्रामीणों का सब्र रात 12 बजे टूट गया। ग्रामीण घरों से निकले और सीधे जालबांधा पुलिस चौकी पहुंच गए। वहां घंटों तक ‘पुलिस मुर्दाबाद’ के नारे गूंजते रहे। ग्रामीणों का साफ कहना था कि अगर पुलिस वक्त रहते सख्त कदम उठाती, तो आरोपियों की इतनी हिम्मत न बढ़ती।
कार्रवाई तो हुई, पर ‘दबाव’ के बाद?
बढ़ते बवाल को देख पुलिस ने आनन-फानन में मुख्य आरोपी भूपत दास उर्फ साहेब, दीपक साहू और सूर्यकांत साहू को हिरासत में लिया। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 170 और 126 के तहत कार्रवाई तो की है, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि यह कदम केवल भीड़ को शांत करने के लिए और भारी दबाव में उठाया गया है।
बड़े सवाल: क्या अनहोनी का इंतजार कर रही थी पुलिस?
चौकी प्रभारी बीरेंद्र चंद्राकर भले ही स्थिति नियंत्रण में होने का दावा कर रहे हों, लेकिन इस घटना ने कई तीखे सवाल छोड़ दिए हैं:
क्या खैरागढ़ पुलिस तभी जागती है जब हालात बेकाबू हो जाते हैं?
क्या गांव में अब भी महिलाएं और बच्चे सुरक्षित महसूस कर पाएंगे?
क्यों एक मामूली विवाद को पुलिस ने इतना बड़ा बनने दिया?
निष्कर्ष: करमतरा में फिलहाल ‘खामोश तनाव’ है। पुलिस की इस सुस्ती ने जनता के भरोसे को चोट पहुंचाई है। अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन इस खौफ को जड़ से खत्म कर पाता है या फिर अगली किसी बड़ी घटना का इंतजार किया जा रहा है।

