MNREGA Controversy : रायपुर (छत्तीसगढ़) : ग्रामीण भारत की लाइफलाइन माने जाने वाली ‘मनरेगा’ (MNREGA) योजना को लेकर छत्तीसगढ़ में एक बड़ा राजनीतिक युद्ध छिड़ गया है। केंद्र सरकार द्वारा लाए गए नए बदलावों और ‘जी-राम-जी’ (G-RAM-G) कानून के खिलाफ कांग्रेस ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) ने राज्य की सभी ग्राम पंचायतों में विशेष जागरूकता अभियान चलाकर मोदी सरकार को घेरने की रणनीति बनाई है।
MNREGA Controversy : ग्राम सभाओं में होगा सत्य का सामना
दरअसल, केंद्र सरकार के निर्देश पर 26 दिसंबर को प्रदेश भर की ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन किया जा रहा है। इन सभाओं में सरकार नए ‘जी-राम-जी’ अधिनियम की खूबियां गिनाने की तैयारी में है। लेकिन कांग्रेस ने इसे ‘भ्रम फैलाने वाली सभा’ करार दिया है। पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज ने पार्टी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे इन ग्राम सभाओं में शामिल हों और ग्रामीणों के सामने सरकार की ‘असली सच्चाई’ रखें।
read more : Khairagarh News : आधी रात हाई-वोल्टेज ड्रामा : थाने में गूंजे पुलिस मुर्दाबाद के नारे, खौफ में करमतरा गांव!
कांग्रेस का आरोप: काम की गारंटी छीन रही भाजपा
कांग्रेस ने सीधा हमला बोलते हुए कहा है कि भाजपा सरकार एक सोची-समझी साजिश के तहत मनरेगा के मूल ढांचे को खत्म कर रही है। कांग्रेस के अनुसार:
कानूनी अधिकार पर हमला: मनरेगा के तहत ग्रामीणों को जो ‘काम की कानूनी गारंटी’ मिली थी, नए बदलावों से उसे कमजोर किया जा रहा है।
मजदूरों का नुकसान: नए संशोधन गरीबों और मजदूरों के हक पर डाका डालने जैसा है।
भ्रामक प्रचार: कांग्रेस का आरोप है कि सरकार इस कानून को ‘गरीब-हितैषी’ बताकर पेश कर रही है, जबकि हकीकत में यह करोड़ों मजदूरों की आजीविका पर सीधा हमला है।
गांव-गांव पहुंचेगी कांग्रेस की टोली
कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता अब हर ग्राम पंचायत में जाकर ग्रामीणों से सीधा संवाद करेंगे। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों को यह बताना है कि मनरेगा में किए जा रहे बदलाव उनके रोजगार के अधिकार को कैसे छीन सकते हैं। कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि वह मोदी सरकार द्वारा फैलाए जा रहे किसी भी भ्रम को बर्दाश्त नहीं करेगी और ग्रामीण भारत के अधिकारों की रक्षा के लिए सड़क से लेकर ग्राम सभा तक संघर्ष करेगी।
राजनीतिक गलियारों में हलचल
छत्तीसगढ़ में इस अभियान के ऐलान के बाद सियासी पारा चढ़ गया है। जहाँ भाजपा इसे ग्रामीण विकास की नई दिशा बता रही है, वहीं कांग्रेस इसे ‘रोजगार की मांग-आधारित प्रकृति’ को खत्म करने की साजिश कह रही है। 26 दिसंबर की ग्राम सभाएं अब केवल सरकारी आयोजन नहीं, बल्कि भाजपा और कांग्रेस के बीच शक्ति प्रदर्शन का केंद्र बनने वाली हैं।

