BlueBird Block-2 Satellite : श्रीहरिकोटा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने आज यानी 24 दिसंबर की सुबह एक ऐसी सफलता हासिल की है, जो दुनिया भर में मोबाइल कनेक्टिविटी की तस्वीर बदल देगी। इसरो के सबसे शक्तिशाली रॉकेट LVM3 (बाहुबली) ने श्रीहरिकोटा से अमेरिका के ‘ब्लूबर्ड ब्लॉक-2’ (BlueBird Block-2) सैटेलाइट को सफलतापूर्वक लॉन्च किया। यह इसरो के इतिहास का अब तक का सबसे भारी कमर्शियल मिशन है, जो पूरी तरह से सफल रहा।
BlueBird Block-2 Satellite : क्या है इस मिशन की सबसे बड़ी खूबी?
इस मिशन की सबसे बड़ी विशेषता इसका विशालकाय एंटीना है। अंतरिक्ष में पहुंचने के बाद जब यह एंटीना पूरी तरह खुलेगा, तो यह लगभग 2400 वर्ग फुट के क्षेत्र को कवर करेगा। यह किसी भी कमर्शियल सैटेलाइट में लगा अब तक का सबसे बड़ा और शक्तिशाली एंटीना सिस्टम है। यह अंतरिक्ष में एक ‘तैरते हुए मोबाइल टावर’ की तरह काम करेगा। सबसे राहत की बात यह है कि इसके लिए आपको किसी महंगे सैटेलाइट फोन की जरूरत नहीं पड़ेगी; आपके पास मौजूद साधारण 4G या 5G स्मार्टफोन सीधे अंतरिक्ष से सिग्नल पकड़ सकेंगे।
खत्म होंगे मोबाइल के ‘डेड ज़ोन’
अक्सर हम देखते हैं कि घने जंगलों, ऊंचे पहाड़ों या समंदर के बीच मोबाइल नेटवर्क गायब हो जाता है। इन इलाकों को ‘डेड ज़ोन’ कहा जाता है। यह सैटेलाइट इन्हीं डेड ज़ोन को खत्म करने के लिए बनाया गया है। अब भौगोलिक चुनौतियों के कारण जहां टावर लगाना संभव नहीं था, वहां भी ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 की मदद से हाई-स्पीड इंटरनेट और वॉयस कॉल की सुविधा मिलेगी। इसके अलावा, बाढ़ या भूकंप जैसी आपदाओं में जब जमीन पर लगे टावर गिर जाते हैं, तब यह सैटेलाइट नेटवर्क लोगों की जान बचाने के लिए संचार का सबसे भरोसेमंद जरिया बनेगा।
इसरो का ‘बाहुबली’ रॉकेट और ऐतिहासिक डील
इस भारी-भरकम सैटेलाइट का वजन लगभग 6500 किलोग्राम है, जिसे अंतरिक्ष में पहुंचाना हर किसी के बस की बात नहीं थी। इसरो के LVM3 रॉकेट ने अपनी ताकत दिखाते हुए इसे पृथ्वी से 520 किलोमीटर ऊपर सटीक कक्षा में स्थापित कर दिया। यह मिशन भारत की कमर्शियल संस्था NSIL और अमेरिकी कंपनी AST स्पेस मोबाइल के बीच एक बड़ा समझौता है।
इस कामयाबी के साथ भारत अब ग्लोबल स्पेस मार्केट में एक लीडर बनकर उभरा है। अब वह दिन दूर नहीं जब ‘नेटवर्क नहीं है’ जैसी समस्या हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी।

