Breaking News: अग्रवाल और सिंधी समाज के ईष्ट देव के खिलाफ भड़काऊ और विवादित बयान देने के मामले में जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के प्रमुख अमित बघेल ने आखिरकार रायपुर के देवेंद्र नगर थाना में सरेंडर कर दिया। उन्हें पुलिस पहले ही भगोड़ा घोषित कर चुकी थी और उनकी गिरफ्तारी पर 5 हजार रुपए का इनाम भी घोषित किया गया था। सरेंडर के दौरान थाना परिसर में भारी पुलिस बल तैनात रहा, जबकि अमित बघेल के समर्थक भी बड़ी संख्या में मौजूद थे। उनके साथ उनके अधिवक्ता भी उपस्थित रहे।
दो थानों में दर्ज थे प्रकरण
सिंधी समाज और अग्रवाल समाज के ईष्ट देवों पर टिप्पणी करने के बाद बघेल के खिलाफ रायपुर के देवेंद्र नगर थाना और कोतवाली थाना—दोनों में एफआईआर दर्ज हुई थी। पुलिस की लगातार तलाश के बावजूद वे फरार थे, जिसके बाद उन्हें भगोड़ा घोषित किया गया।
क्या था विवाद? ईष्ट देवों पर दिया था बयान
27 अक्टूबर 2025 को छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति तोड़फोड़ की घटना के बाद अमित बघेल मौके पर पहुंचे थे।
इस दौरान उन्होंने
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अग्रसेन महाराज,
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सिंधी समाज के ईष्ट देव झूलेलाल
के खिलाफ विवादित टिप्पणी की थी, जिसके बाद दोनों समाजों में भारी नाराजगी फैल गई।
कैसे शुरू हुआ पूरा मामला?
26 अक्टूबर 2025 को रायपुर के VIP चौक में छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति तोड़फोड़ की गई थी। अगले दिन मौके पर पहुंचकर अमित बघेल ने हंगामा किया, जिससे पुलिस और उनके समर्थकों के बीच तनाव बढ़ गया।
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अगली सुबह पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
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आरोपी मानसिक रूप से अस्वस्थ था और नशे की हालत में घटना को अंजाम दिया था।
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इसके बाद मूर्ति को पुनः स्थापित कर दिया गया।
अग्रवाल और सिंधी समाज ने जताया था तीखा विरोध
अमित बघेल के बयान के बाद
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रायपुर,
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रायगढ़,
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सरगुजा
सहित कई जिलों में अग्रवाल और सिंधी समाज ने विरोध प्रदर्शन किया। सिंधी समाज के पदाधिकारियों ने कोतवाली थाने में अलग से शिकायत दर्ज कराई और गिरफ्तारी की मांग की।
अब आगे क्या?
सरेंडर के बाद पुलिस विधिक प्रक्रिया के तहत कार्रवाई कर रही है। मामला गंभीर धारा और धार्मिक भावनाओं से जुड़े प्रकरणों से संबंधित होने के कारण कोर्ट में आगे की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी।

