Religion Archives - Maarmik.in https://maarmik.in/category/religion/ खबरों का नया दृष्टिकोण Mon, 22 Sep 2025 06:04:59 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.1 https://maarmik.in/wp-content/uploads/2025/06/cropped-m-logo-scaled-1-32x32.png Religion Archives - Maarmik.in https://maarmik.in/category/religion/ 32 32 Navratri In Chhattisgarh: एक मात्र महालक्ष्मी मंदिर, 800 साल पहले हुआ था निर्माण…! https://maarmik.in/navratri-in-chhattisgarh-the-only-mahalaxmi-temple-built-800-years-ago/ https://maarmik.in/navratri-in-chhattisgarh-the-only-mahalaxmi-temple-built-800-years-ago/#respond Mon, 22 Sep 2025 06:04:59 +0000 https://maarmik.in/?p=5496 Navratri In Chhattisgarh: शारदीय नवरात्रि (Shardiya Navratri 2025) पर आस्था के प्रमुख केंद्रों की चर्चा में रतनपुर स्थित महालक्ष्मी (लखनी देवी) मंदिर का नाम विशेष स्थान रखता है। यह मंदिर छत्तीसगढ़ का एकमात्र प्राचीन महालक्ष्मी मंदिर है, जिसकी अद्भुत संरचना शास्त्रों में वर्णित पुष्पक विमान जैसी है। बिलासपुर से करीब 25 किलोमीटर दूर रतनपुर-कोटा मार्ग […]

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Navratri In Chhattisgarh: शारदीय नवरात्रि (Shardiya Navratri 2025) पर आस्था के प्रमुख केंद्रों की चर्चा में रतनपुर स्थित महालक्ष्मी (लखनी देवी) मंदिर का नाम विशेष स्थान रखता है। यह मंदिर छत्तीसगढ़ का एकमात्र प्राचीन महालक्ष्मी मंदिर है, जिसकी अद्भुत संरचना शास्त्रों में वर्णित पुष्पक विमान जैसी है। बिलासपुर से करीब 25 किलोमीटर दूर रतनपुर-कोटा मार्ग पर स्थित यह धाम हजारों-लाखों भक्तों की आस्था का केंद्र है।

1179 में हुआ था निर्माण

इतिहासकार बताते हैं कि इस मंदिर का निर्माण कलचुरी राजा रत्नदेव तृतीय के मंत्री गंगाधर ने ईस्वी सन् 1179 में कराया था। उस समय राज्य में भयंकर अकाल और महामारी फैली हुई थी। मंदिर के निर्माण और देवी की प्रतिष्ठा के बाद समृद्धि लौटी और प्रजा को राहत मिली।

लखनी देवी नाम से प्रसिद्ध

मंदिर को आज भी लखनी देवी मंदिर के नाम से जाना जाता है। विद्वानों के अनुसार “लखनी” शब्द दरअसल “लक्ष्मी” का ही अपभ्रंश है, जो स्थानीय बोली में रूढ़ हो गया।

मंदिर की विशेषताएं

  • मंदिर की आकृति पुष्पक विमान जैसी है।

  • गर्भगृह में श्रीयंत्र उत्कीर्ण है, जिसकी पूजा से धन, सुख और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।

  • देवी महालक्ष्मी का स्वरूप अष्टलक्ष्मी में से सौभाग्य लक्ष्मी का है।

  • प्रतिमा को अष्टदल कमल पर विराजमान दिखाया गया है।

हर गुरुवार और दीपावली पर विशेष पूजा

मार्गशीर्ष महीने के हर गुरुवार को यहां विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस दिन दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
दीपावली के अवसर पर मंदिर में विशेष आयोजन होता है। भक्त 252 सीढ़ियां चढ़कर देवी के दर्शन करते हैं। इस दिन पुजारी माता का भव्य श्रृंगार कर विशेष पूजा विधि सम्पन्न करते हैं।

आस्था और मान्यता

भक्त मानते हैं कि यहां पूजा-अर्चना करने से न केवल धन-वैभव की प्राप्ति होती है, बल्कि सौभाग्य और मनोकामना भी पूरी होती है। यही कारण है कि शारदीय नवरात्रि और दीपावली पर यहां श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है।

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Rashifal 22 September 2025: किसके लिए बनेगा तरक्की का योग और किसे रखना होगा सावधान https://maarmik.in/horoscope-22-september-2025-who-will-have-the-chance-of-progress-and-who-will-have-to-be-cautious/ https://maarmik.in/horoscope-22-september-2025-who-will-have-the-chance-of-progress-and-who-will-have-to-be-cautious/#respond Sun, 21 Sep 2025 20:50:53 +0000 https://maarmik.in/?p=5492 Rashifal 22 September 2025: 22 सितंबर 2025 का राशिफल सभी राशियों के लिए अलग-अलग परिणाम लेकर आया है। कुछ राशियों को धन और करियर में सफलता मिलेगी, तो कुछ को स्वास्थ्य और रिश्तों में सावधानी बरतनी होगी। मेष (Aries)आज का दिन सकारात्मक रहेगा। परिवार के साथ समय बिताने का अवसर मिलेगा। छोटी यात्रा संभव है। आर्थिक […]

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Rashifal 22 September 2025: 22 सितंबर 2025 का राशिफल सभी राशियों के लिए अलग-अलग परिणाम लेकर आया है। कुछ राशियों को धन और करियर में सफलता मिलेगी, तो कुछ को स्वास्थ्य और रिश्तों में सावधानी बरतनी होगी।

मेष (Aries)
आज का दिन सकारात्मक रहेगा। परिवार के साथ समय बिताने का अवसर मिलेगा। छोटी यात्रा संभव है। आर्थिक मामलों में सोच-समझकर फैसला लें, वरना नुकसान हो सकता है।

वृषभ (Taurus)
संपत्ति से जुड़ा कोई काम लाभ दिला सकता है। विरोधियों से सावधान रहें। बिना सोचे-समझे पैसे खर्च न करें। प्रॉपर्टी डील में जल्दबाज़ी से बचें।

मिथुन (Gemini)
आपकी मेहनत रंग लाएगी। दोस्तों के साथ अच्छा समय बीतेगा। विद्यार्थी पढ़ाई पर ध्यान दें। वाहन में अचानक खराबी खर्च बढ़ा सकती है। किसी कानूनी मामले में विशेषज्ञ की सलाह लेना उपयोगी रहेगा।

कर्क (Cancer)
आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। अनावश्यक गुस्से से रिश्ते बिगड़ सकते हैं। कोई पुराना कर्ज चुकाने में सफलता मिलेगी। परिवार में आपकी जिम्मेदारी बढ़ सकती है।

सिंह (Leo)
आज किसी फैसले में जल्दबाज़ी न करें। अविवाहित जातकों के लिए विवाह प्रस्ताव आ सकता है। माता की सेहत पर ध्यान दें। खर्चे बढ़ सकते हैं।

कन्या (Virgo)
नए अवसर सामने आएंगे। संतान से जुड़ी खुशखबरी मिल सकती है। विद्यार्थी उच्च शिक्षा में सफलता पाएंगे। आर्थिक मामलों को लेकर सावधानी रखें। बिना मांगे सलाह देने से बचें।

तुला (Libra)
आज आत्मविश्वास ऊंचा रहेगा। जीवनसाथी से सुखद सरप्राइज मिल सकता है। कार्यक्षेत्र में किसी विवाद में न पड़ें। नए काम में जोखिम न लें।

वृश्चिक (Scorpio)
कामकाज में अच्छे परिणाम मिलेंगे। प्रेम जीवन में मिठास रहेगी। नौकरीपेशा लोग व्यस्त रहेंगे। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वालों के लिए दिन शुभ रहेगा।

धनु (Sagittarius)
धन संबंधी मामलों में सावधानी जरूरी है। जल्दबाज़ी में लिया गया फैसला नुकसान दे सकता है। घर में मांगलिक कार्य का योग है। बच्चों को जिम्मेदारी देने का समय है।

मकर (Capricorn)
आज अधूरे काम पूरे होंगे। बिजनेस में नए प्रोजेक्ट शुरू हो सकते हैं। दोस्तों के साथ समय बिताकर मन प्रसन्न होगा। निजी बातें दूसरों से साझा न करें।

कुंभ (Aquarius)
दिन सामान्य रहेगा। मानसिक तनाव से बचें। छोटे लाभ के अवसर हाथ आएंगे। खानपान संतुलित रखें। विद्यार्थियों को पढ़ाई में कठिनाई हो सकती है।

मीन (Pisces)
भावनाओं के बहाव में निर्णय न लें। कारोबार में सतर्क रहें, धोखा मिलने की संभावना है। जीवनसाथी की राय पर निवेश न करें। कार्यभार अधिक रहेगा।

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धनु राशि वालों को गुस्से पर काबू रखना होगा, जानिए आज सभी राशियों का हाल https://maarmik.in/sagittarius-people-will-have-to-control-their-anger-know-the-condition-of-all-zodiac-signs-today/ https://maarmik.in/sagittarius-people-will-have-to-control-their-anger-know-the-condition-of-all-zodiac-signs-today/#respond Fri, 19 Sep 2025 03:26:17 +0000 https://maarmik.in/?p=5235 मेष राशिघर-परिवार में सुख-शांति बनी रहेगी। नई खुशखबर मिल सकती है। अविवाहित लोग किसी से आकर्षित हो सकते हैं। कार्यक्षेत्र में बहस से बचें। वृषभ राशिधन लाभ होगा। पिताजी की सलाह से कार्यक्षेत्र में सफलता मिलेगी। विद्यार्थियों को पढ़ाई पर ध्यान देना जरूरी है। दूसरों के लिए की गई भलाई को लोग गलत समझ सकते […]

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मेष राशि
घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहेगी। नई खुशखबर मिल सकती है। अविवाहित लोग किसी से आकर्षित हो सकते हैं। कार्यक्षेत्र में बहस से बचें।

वृषभ राशि
धन लाभ होगा। पिताजी की सलाह से कार्यक्षेत्र में सफलता मिलेगी। विद्यार्थियों को पढ़ाई पर ध्यान देना जरूरी है। दूसरों के लिए की गई भलाई को लोग गलत समझ सकते हैं।

मिथुन राशि
आज वाणी और व्यवहार पर संयम रखें। संतान से शुभ समाचार मिलेगा। दांपत्य जीवन में तनाव रह सकता है। व्यवसाय में बड़ा लाभ संभव है।

कर्क राशि
जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा। ऑफिस में नई जिम्मेदारी दी जा सकती है। लंबे समय से रुका हुआ काम पूरा होगा। पुराने अनुभवों से सबक लें।

सिंह राशि
आज का दिन सामान्य रहेगा। कार्यक्षेत्र में पदोन्नति मिल सकती है। घर में पूजा-पाठ का आयोजन होगा। विरोधियों की बातों में न आएं।

कन्या राशि
वाद-विवाद से दूरी बनाए रखें। जीवनसाथी की भावनाओं का सम्मान करें। संतान बाहर जा सकती है। किसी परिजन की सेहत कमजोर हो सकती है।

तुला राशि
व्यापार में अधिक लाभ नहीं होगा। दोस्तों के साथ समय अच्छा बीतेगा। पुरानी चिंता दूर होगी। काम में आलस्य नुकसान पहुंचा सकता है।

वृश्चिक राशि
नई शुरुआत के लिए दिन शुभ है। प्रतियोगिता में सफलता मिलेगी। संपत्ति से लाभ के योग हैं। जल्दबाज़ी में कोई निर्णय न लें।

धनु राशि
आज गुस्से से बचना जरूरी है। किसी बात पर घर के बड़े नाराज़ हो सकते हैं। जल्दबाजी में निर्णय लेने से नुकसान होगा। संतान की मांग पूरी करने में खर्च बढ़ सकता है।

मकर राशि
कानूनी मामलों में राहत मिलेगी। व्यवसाय में बदलाव लाभकारी होगा। साझेदारी में सतर्क रहें। परिवार के सदस्य के करियर से जुड़ी समस्या दूर हो सकती है।

कुंभ राशि
स्वास्थ्य का ध्यान रखें, मौसम का असर हो सकता है। घर में मांगलिक कार्य होगा। यात्रा में सावधानी बरतें। भाई-बहनों का सहयोग मिलेगा।

मीन राशि
दिन सकारात्मक परिणाम देने वाला है। धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी। विद्यार्थियों को अच्छे परिणाम मिलेंगे। लंबी दूरी की यात्रा का योग है।

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Navratri In Chhattisgarh: तीनों महाशक्तियों का अद्भुत संगम, आस्था का अद्वितीय केंद्र https://maarmik.in/navratri-in-chhattisgarh-a-wonderful-confluence-of-the-three-superpowers/ https://maarmik.in/navratri-in-chhattisgarh-a-wonderful-confluence-of-the-three-superpowers/#respond Tue, 16 Sep 2025 20:49:05 +0000 https://maarmik.in/?p=5223 रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी, केवल प्रशासनिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि धार्मिक आस्था के लिए भी प्रसिद्ध है। यहाँ स्थित माँ महामाया मंदिर, पुरानी बस्ती में, एक सिद्ध शक्तिपीठ है जहाँ तीनों महाशक्तियाँ — महालक्ष्मी, महाकाली और महासरस्वती — एक साथ विराजमान हैं। यही कारण है कि यह मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का अद्वितीय केंद्र […]

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रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी, केवल प्रशासनिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि धार्मिक आस्था के लिए भी प्रसिद्ध है। यहाँ स्थित माँ महामाया मंदिर, पुरानी बस्ती में, एक सिद्ध शक्तिपीठ है जहाँ तीनों महाशक्तियाँ — महालक्ष्मी, महाकाली और महासरस्वती — एक साथ विराजमान हैं। यही कारण है कि यह मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का अद्वितीय केंद्र माना जाता है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

हैहयवंशी राजाओं ने छत्तीसगढ़ में 36 किलों का निर्माण कराया था और प्रत्येक किले के प्रारंभ में माँ महामाया का मंदिर बनवाया था। इन्हीं में से एक गढ़ रायपुर भी था, जहाँ राजा मोरध्वज ने इस मंदिर का निर्माण कराया। बाद में भोसला सामंतों और अंग्रेजी हुकूमत ने भी इसकी देखरेख की।

किंवदंती के अनुसार, राजा मोरध्वज एक बार सेना के साथ खारून नदी के तट पर गए थे। वहाँ उन्हें माँ महामाया की प्रतिमा दिखाई दी और माँ ने उन्हें आदेश दिया कि वे नगर के बीचों-बीच उनका मंदिर बनवाएँ। राजा ने माता की प्रतिमा को अपने कंधे पर रखकर लाने का संकल्प लिया, परंतु गर्भगृह तक पहुँचने से पहले ही भूलवश प्रतिमा को चबूतरे पर रख दिया। उसी क्षण प्रतिमा वहीं स्थापित हो गई।

यही कारण है कि आज भी मंदिर के दरवाजे से सीधे माँ की प्रतिमा नहीं दिखाई देती।

तांत्रिक शैली और दिव्यता

मंदिर की वास्तुकला अद्वितीय है। गर्भगृह की निर्माण शैली तांत्रिक विधि की है और मंदिर के गुंबद में श्रीयंत्र की आकृति बनी हुई है। यहाँ माँ महामाया महालक्ष्मी रूप में विराजमान हैं, तो सामने समलेश्वरी देवी महासरस्वती स्वरूप में पूजित हैं। साथ ही, देवी महाकाली की उपस्थिति भी यहाँ स्थापित है। इस प्रकार, यह मंदिर त्रिदेवी के संगम का प्रतीक है।

सर्वधर्म आस्था का केंद्र

यह मंदिर केवल हिंदू भक्तों का ही नहीं, बल्कि मुस्लिम परिवारों का भी आस्था स्थल है। हर साल शारदीय और चैत्र नवरात्रि पर ज्योत प्रज्वलित की जाती है, जिसमें मुस्लिम परिवार भी भाग लेते हैं। इसके अलावा, देश-विदेश से श्रद्धालु यहाँ आकर मनोकामना ज्योत जलाते हैं।

आस्था और महिमा

माँ महामाया मंदिर की महिमा अपरम्पार है। नवरात्रि के दिनों में यहाँ भव्य आयोजन होते हैं और हजारों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए उमड़ पड़ते हैं। यह स्थल न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक है।

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Navratri In Chhattisgarh: इस देवी का मंदिर 52 शक्तिपीठों में से एक, स्वयं काल भैरव हैं रक्षक https://maarmik.in/navratri-in-chhattisgarh-the-temple-of-this-goddess-is-one-of-the-52-shaktipeeths/ https://maarmik.in/navratri-in-chhattisgarh-the-temple-of-this-goddess-is-one-of-the-52-shaktipeeths/#respond Tue, 16 Sep 2025 20:32:34 +0000 https://maarmik.in/?p=5220 रतनपुर: छत्तीसगढ़ की पौराणिक नगरी, माँ महामाया देवी के कारण पूरे भारत में प्रसिद्ध है। यह मंदिर 52 शक्तिपीठों में से एक है और आदिशक्ति महामाया को समर्पित है। यहाँ देवी को कोशलेश्वरी के नाम से भी पूजा जाता है, जो प्राचीन दक्षिण कोशल (वर्तमान छत्तीसगढ़) की अधिष्ठात्री देवी हैं। मंदिर का इतिहास माँ महामाया मंदिर […]

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रतनपुर: छत्तीसगढ़ की पौराणिक नगरी, माँ महामाया देवी के कारण पूरे भारत में प्रसिद्ध है। यह मंदिर 52 शक्तिपीठों में से एक है और आदिशक्ति महामाया को समर्पित है। यहाँ देवी को कोशलेश्वरी के नाम से भी पूजा जाता है, जो प्राचीन दक्षिण कोशल (वर्तमान छत्तीसगढ़) की अधिष्ठात्री देवी हैं।

मंदिर का इतिहास

माँ महामाया मंदिर का निर्माण राजा रत्नदेव प्रथम ने 11वीं शताब्दी (1050 ई.) में कराया था। कथा है कि 1045 ई. में राजा रत्नदेव प्रथम ने मणिपुर गाँव (वर्तमान रतनपुर) में एक वट वृक्ष के नीचे दिव्य प्रकाश देखा। उस स्थान पर देवी महामाया की सभा लगी थी। इस अद्भुत दृश्य ने उन्हें चमत्कृत कर दिया और तभी उन्होंने रतनपुर को अपनी राजधानी बनाकर माँ महामाया का भव्य मंदिर बनवाया।

बाद में, विक्रम संवत 1552 में मंदिर का पुनर्निर्माण और जीर्णोद्धार किया गया। इसका स्थापत्य कला अद्वितीय है। गर्भगृह और मंडप को एक सुदृढ़ प्रांगण से घेरा गया है, जिसे 18वीं शताब्दी के अंत में मराठा शासनकाल में किलेबंद किया गया।

शक्तिपीठ की मान्यता

शास्त्रों में वर्णित है कि माता सती के अंग जहाँ-जहाँ गिरे, वहाँ शक्तिपीठ बने। रतनपुर स्थित इस स्थल पर माता का दाहिना स्कंध गिरा था। भगवान शिव ने स्वयं इसे कौमारी शक्तिपीठ का नाम दिया। इसी कारण यह स्थान माँ के 51 शक्तिपीठों में गिना जाता है।

नवरात्र के अवसर पर यहाँ विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन होता है। मान्यता है कि यहाँ की गई पूजा कभी निष्फल नहीं जाती।

त्रिदेवी की उपस्थिति

मूल रूप से यह मंदिर तीन देवियों — महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती — को समर्पित था। समय के साथ महाकाली का अलग मंदिर बन गया और वर्तमान मंदिर मुख्यतः देवी महालक्ष्मी और महासरस्वती के लिए जाना जाता है।

काल भैरव की भूमिका

माँ महामाया मंदिर के रक्षक के रूप में काल भैरव की विशेष मान्यता है। महामाया मंदिर जाने वाले श्रद्धालु अपनी यात्रा तभी पूर्ण मानते हैं, जब वे काल भैरव मंदिर में पूजा अर्चना कर आते हैं।

आस्था और आभा

आज भी सुबह से देर रात तक मंदिर परिसर में भक्तों का तांता लगा रहता है। रतनपुर सिर्फ एक नगर नहीं, बल्कि माँ महामाया की नगरी है। यहाँ के तालाब, मंदिर और ऐतिहासिक धरोहर इस स्थान को और भी पवित्र और आकर्षक बनाते हैं।

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Navratri In Chhattisgarh: 2200 साल पुराना पहाड़ी पर विराजमान मंदिर, प्रेम कहानी से जुड़ी है इसकी पहचान…! https://maarmik.in/navratri-in-chhattisgarh-2200-years-old-temple-situated-on-the-hill/ https://maarmik.in/navratri-in-chhattisgarh-2200-years-old-temple-situated-on-the-hill/#respond Mon, 15 Sep 2025 20:55:18 +0000 https://maarmik.in/?p=5201 राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ में स्थित मां बम्लेश्वरी देवी का मंदिर आस्था और परंपरा का प्रमुख केंद्र है। राज्य की सबसे ऊंची पहाड़ी पर विराजमान यह मंदिर लगभग 2200 वर्ष पुराना है और इसके साथ एक प्रसिद्ध प्रेम कथा भी जुड़ी है। नवरात्रि के दौरान यहां लाखों श्रद्धालु मां के दर्शन के […]

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राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ में स्थित मां बम्लेश्वरी देवी का मंदिर आस्था और परंपरा का प्रमुख केंद्र है। राज्य की सबसे ऊंची पहाड़ी पर विराजमान यह मंदिर लगभग 2200 वर्ष पुराना है और इसके साथ एक प्रसिद्ध प्रेम कथा भी जुड़ी है। नवरात्रि के दौरान यहां लाखों श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

पहाड़ पर स्थित आस्था का केंद्र

मां बम्लेश्वरी देवी का यह भव्य मंदिर लगभग 1000 से अधिक सीढ़ियां चढ़कर पहाड़ी की चोटी पर स्थित है। जो भक्त ऊपर नहीं चढ़ पाते, उनके लिए नीचे छोटी बम्लेश्वरी का मंदिर भी है। अब यहां भक्तों की सुविधा के लिए रोपवे की व्यवस्था भी की गई है।

पुत्र प्राप्ति के लिए राजा ने बनवाया मंदिर

इतिहासकार बताते हैं कि करीब ढाई हजार वर्ष पूर्व यहां राजा वीरसेन का शासन था। वे नि:संतान थे। संतान प्राप्ति के लिए उन्होंने मां दुर्गा और भगवान शिव की उपासना की। फलस्वरूप उन्हें पुत्र की प्राप्ति हुई। आभारस्वरूप राजा वीरसेन ने मां बम्लेश्वरी का यह मंदिर बनवाया।

कामकंदला और माधवानल की प्रेम कहानी

डोंगरगढ़ का इतिहास केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि प्रेम और त्याग की गाथा से भी जुड़ा है। कहा जाता है कि राजा वीरसेन के वंशज काल में राजदरबार की राजनर्तकी कामकंदला और एक संगीतज्ञ माधवानल के बीच प्रेम हुआ। उनकी प्रेम कहानी ने न केवल कामाख्या नगरी (वर्तमान डोंगरगढ़) को चर्चा में ला दिया, बल्कि युद्ध, बलिदान और आस्था का प्रतीक भी बना दिया।

माधवानल और कामकंदला के प्रेम का विरोध राजपरिवार ने किया। घटनाक्रम ने ऐसा मोड़ लिया कि उज्जैन के राजा विक्रमादित्य को हस्तक्षेप करना पड़ा। भीषण युद्ध में कामाख्या नगरी ध्वस्त हो गई और प्रेमियों की कहानी बलिदान और त्रासदी में समाप्त हुई। कहा जाता है कि कामकंदला ने तालाब में कूदकर प्राण त्याग दिए और उसके पीछे माधवानल ने भी अपना जीवन समाप्त कर दिया। यह तालाब आज भी कामकंदला तालाब के नाम से प्रसिद्ध है।

विक्रमादित्य और मां बम्लेश्वरी का जागृत स्वरूप

इतिहास के अनुसार, कामकंदला और माधवानल की मृत्यु के बाद राजा विक्रमादित्य ने मां बगुलामुखी (बम्लेश्वरी) की आराधना की। देवी ने प्रकट होकर राजा को आत्मोत्सर्ग से रोका और अपना जागृत रूप यहीं प्रतिष्ठित किया। तभी से डोंगरगढ़ का यह स्थल मां बम्लेश्वरी देवी के नाम से जाना जाने लगा और श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बन गया।

नवरात्रि पर उमड़ता है जनसैलाब

हर साल चैत्र और शारदीय नवरात्रि में यहां लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। माता के दरबार में 24 घंटे भक्तों का रेला लगा रहता है। यहां की धार्मिक, ऐतिहासिक और पौराणिक महत्ता डोंगरगढ़ को छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा धार्मिक पर्यटन स्थल बनाती है।

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Navratri In Chhattisgarh: नवरात्रि में देवी नहीं, परेतिन दाई की पूजा…! https://maarmik.in/navratri-in-chhattisgarh-in-navratri-not-goddess-but-paretein-dai-is-worshipped/ https://maarmik.in/navratri-in-chhattisgarh-in-navratri-not-goddess-but-paretein-dai-is-worshipped/#respond Sun, 14 Sep 2025 20:57:23 +0000 https://maarmik.in/?p=5156 बालोद। नवरात्रि का पर्व जहां देशभर में मां दुर्गा और उनके नौ रूपों की पूजा-अर्चना के लिए प्रसिद्ध है, वहीं छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के अर्जुन्दा नगर पंचायत से महज चार किलोमीटर दूर स्थित झिंका गांव में एक अनोखी परंपरा निभाई जाती है। यहां नौ दिनों तक देवी दुर्गा की नहीं बल्कि परेतिन दाई की […]

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बालोद। नवरात्रि का पर्व जहां देशभर में मां दुर्गा और उनके नौ रूपों की पूजा-अर्चना के लिए प्रसिद्ध है, वहीं छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के अर्जुन्दा नगर पंचायत से महज चार किलोमीटर दूर स्थित झिंका गांव में एक अनोखी परंपरा निभाई जाती है। यहां नौ दिनों तक देवी दुर्गा की नहीं बल्कि परेतिन दाई की पूजा की जाती है।

108 मनोकामना ज्योति कलश से सजता मंदिर

परेतिन माता के मंदिर में चैत्र और शारदीय नवरात्रि दोनों ही अवसरों पर विशेष आयोजन किए जाते हैं। इस दौरान 108 मनोकामना ज्योति कलश प्रज्ज्वलित किए जाते हैं और ग्रामीण विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं। नवरात्रि के नौ दिनों तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है।

सदियों पुरानी मान्यता

स्थानीय लोगों के अनुसार, यह परंपरा सैकड़ों सालों से चली आ रही है। मान्यता है कि पहले जब राहगीर इस स्थान से बिना प्रणाम किए गुजरते थे तो उनके साथ किसी न किसी तरह की अनहोनी हो जाती थी। इसके बाद से राहगीर नीम के पेड़ को प्रणाम कर गुजरने लगे। धीरे-धीरे यहां मंदिर का निर्माण हुआ और परेतिन दाई की पूजा की परंपरा स्थापित हो गई।

अनोखी श्रद्धा और आस्था

आज भी ग्रामीण और राहगीर मंदिर से गुजरते समय अपने पास रखी वस्तुओं का कुछ हिस्सा—जैसे दूध, सब्जी, ईंट, गिट्टी, रेत आदि—परेतिन दाई को अर्पित करते हैं। व्यापारी यहां तक कि अपने वाहनों का हॉर्न बजाकर भी माता को प्रणाम करते हैं। ग्रामीण मानते हैं कि ऐसा न करने पर अनहोनी निश्चित है।

मनोकामनाओं की पूर्ति में विश्वास

गांव के लोगों का मानना है कि नवजात शिशु के लगातार रोने पर परेतिन माता को काला चूड़ी और काजल चढ़ाने से बच्चा शांत हो जाता है। वहीं, निःसंतान दंपत्ति सच्ची श्रद्धा से परेतिन दाई की आराधना करें तो उन्हें संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है।

नवरात्रि पर उमड़ती भीड़

नवरात्रि के अवसर पर मंदिर में दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंचते हैं और अपनी-अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए ज्योति कलश प्रज्ज्वलित करते हैं। इस दौरान झिंका गांव आस्था और परंपरा का केंद्र बन जाता है।

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Aaj ka Arthik Rashifal: कई राशियों के लिए यह दिन लाभदायक रहेगा, आइए जानते हैं राशियों का हाल https://maarmik.in/todays-financial-horoscope-this-day-will-be-beneficial-for-many-zodiac-signs/ https://maarmik.in/todays-financial-horoscope-this-day-will-be-beneficial-for-many-zodiac-signs/#respond Fri, 12 Sep 2025 21:48:30 +0000 https://maarmik.in/?p=5133 Aaj ka Arthik Rashifal: सितारे संकेत दे रहे हैं कि कई राशियों के लिए यह दिन लाभदायक रहेगा। खासकर कन्या राशि वाले जातक अपने सभी आर्थिक कार्य पूरे कर पाएंगे। आइए जानते हैं बाकी राशियों का हाल! मेषआज आपको मनचाहे प्रस्ताव मिलेंगे। बैंकिंग और निवेश से जुड़े कार्य सफल रहेंगे। बचत और सम्मान दोनों बढ़ेंगे। वृषभआर्थिक […]

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Aaj ka Arthik Rashifal: सितारे संकेत दे रहे हैं कि कई राशियों के लिए यह दिन लाभदायक रहेगा। खासकर कन्या राशि वाले जातक अपने सभी आर्थिक कार्य पूरे कर पाएंगे। आइए जानते हैं बाकी राशियों का हाल!

मेष
आज आपको मनचाहे प्रस्ताव मिलेंगे। बैंकिंग और निवेश से जुड़े कार्य सफल रहेंगे। बचत और सम्मान दोनों बढ़ेंगे।

वृषभ
आर्थिक लक्ष्यों की प्राप्ति होगी। योजनाएं तेजी से आगे बढ़ेंगी और मान-सम्मान बढ़ेगा। आत्मविश्वास मजबूत रहेगा।

मिथुन
निवेश बढ़ेगा, लेकिन कोर्ट-कचहरी के मामलों से सावधान रहें। अनुशासन और धैर्य से काम लें।

कर्क
आज हर क्षेत्र में मनचाहे परिणाम मिलेंगे। सरकार और प्रशासन से जुड़े काम सफल होंगे। लंबित कार्य पूरे करें।

सिंह
नए अवसर मिलेंगे और संपत्ति बढ़ेगी। बातचीत में प्रभावी रहेंगे। व्यवस्थित ढंग से काम करने से लाभ होगा।

कन्या
आर्थिक प्रदर्शन बेहतर होगा। योजनाएं और संकल्प पूरे होंगे। परिस्थितियां अनुकूल रहेंगी और परेशानियां दूर होंगी।

तुला
अनुबंधों और नए रिश्तों में सावधानी रखें। अफवाहों से प्रभावित न हों। विवेक और सूझबूझ से ही लाभ मिलेगा।

वृश्चिक
सफलता का प्रतिशत ऊंचा रहेगा। भूमि-भवन से जुड़े मामले सुलझेंगे। वित्तीय मामलों में सहजता आएगी।

धनु
योजनाबद्ध ढंग से काम करें। तथ्यों पर जोर दें और प्रलोभनों से बचें। वित्तीय कार्यों में सकारात्मक नतीजे मिलेंगे।

मकर
आर्थिक पक्ष उम्मीद के अनुसार रहेगा। पद और प्रभाव बढ़ेगा। अनुभवी लोगों की सलाह लाभकारी होगी।

कुंभ
भवन, वाहन और भौतिक संसाधनों से जुड़े मामलों में सफलता मिलेगी। प्रबंधन और व्यावसायिक योजनाओं में लाभ होगा।

मीन
टीम वर्क मजबूत होगा। शुभ समाचार मिलेंगे। योजनाएं आकार लेंगी और पद-प्रतिष्ठा बढ़ेगी।

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नवरात्रि की शुरुआत: किसने रखा था पहला 9 दिनों का व्रत? जानिए पूरी कहानी https://maarmik.in/beginning-of-navratri-who-kept-the-first-9-day-fast-know-the-whole-story/ https://maarmik.in/beginning-of-navratri-who-kept-the-first-9-day-fast-know-the-whole-story/#respond Wed, 10 Sep 2025 20:21:44 +0000 https://maarmik.in/?p=5066 नवरात्रि का महत्व: नवरात्रि भारत का एक प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक पर्व है। साल में चार बार नवरात्रि आती है – चैत्र, शारदीय और दो गुप्त नवरात्रियां। इनमें से चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि का विशेष महत्व है। इस दौरान भक्त मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करते हैं और नौ दिनों का व्रत […]

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नवरात्रि का महत्व: नवरात्रि भारत का एक प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक पर्व है। साल में चार बार नवरात्रि आती है – चैत्र, शारदीय और दो गुप्त नवरात्रियां। इनमें से चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि का विशेष महत्व है। इस दौरान भक्त मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करते हैं और नौ दिनों का व्रत रखते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि नवरात्रि मनाने की शुरुआत कब हुई और पहला 9 दिनों का व्रत किसने रखा था?

नवरात्रि की शुरुआत कैसे हुई?

वाल्मीकि रामायण के अनुसार, नवरात्रि की शुरुआत प्रभु श्रीराम से जुड़ी है। जब वे लंका विजय के लिए तैयार हो रहे थे, तो उन्होंने मां दुर्गा के शक्ति स्वरूप चंडी देवी की आराधना करने का संकल्प लिया।

ब्रह्मा जी ने श्रीराम को सलाह दी कि वे प्रतिपदा से लेकर नवमी तक व्रत रखें और चंडी देवी की पूजा करें। इसके साथ ही उन्हें 108 नीलकमल चढ़ाने का भी निर्देश दिया गया।

नीलकमल की परीक्षा और श्रीराम की भक्ति

राम जी ने 108 नीलकमल इकट्ठा किए, लेकिन रावण ने अपनी मायावी शक्ति से उनमें से एक कमल गायब कर दिया। पूजा के दौरान जब श्रीराम ने देखा कि एक कमल कम है, तो उन्होंने अपनी आंख अर्पित करने का निश्चय किया।

जैसे ही उन्होंने अपनी आंख निकालने के लिए तीर उठाया, माता चंडी प्रकट हुईं और उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें विजय का आशीर्वाद दिया।

सबसे पहले किसने रखा नवरात्रि का व्रत?

इतिहास और ग्रंथों के अनुसार, प्रभु श्रीराम ही पहले ऐसे राजा और मनुष्य थे जिन्होंने प्रतिपदा से नवमी तक नौ दिनों का व्रत रखा। इसी साधना और तपस्या के बाद उन्हें रावण पर विजय प्राप्त हुई।

इसी घटना को नवरात्रि का मूल आधार माना जाता है और तभी से नौ दिनों तक उपवास और देवी आराधना की परंपरा शुरू हुई।

नवरात्रि का संदेश

नवरात्रि सिर्फ पूजा और व्रत का पर्व नहीं है, बल्कि यह शक्ति, भक्ति और विजय का प्रतीक है। यह पर्व हमें सिखाता है कि आस्था और समर्पण के साथ शक्ति की उपासना करने से हर कठिनाई पर विजय पाई जा सकती है।

नवरात्रि से जुड़े प्रमुख प्रश्न (FAQ)

Q1. नवरात्रि कब से शुरू हुई?
नवरात्रि की परंपरा का आरंभ त्रेतायुग में प्रभु श्रीराम से हुआ, जब उन्होंने लंका विजय से पहले नौ दिनों का व्रत रखा था।

Q2. सबसे पहले नवरात्रि का व्रत किसने रखा?
सबसे पहले नवरात्रि का व्रत प्रभु श्रीराम ने रखा था।

Q3. नवरात्रि क्यों मनाई जाती है?
मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा और उनकी कृपा पाने के लिए नवरात्रि मनाई जाती है। यह शक्ति, समर्पण और विजय का पर्व है।

Q4. नवरात्रि साल में कितनी बार आती है?
साल में चार बार नवरात्रि आती है – चैत्र, शारदीय और दो गुप्त नवरात्रियां।

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Karwa Chauth 2025: करवा चौथ कब है? जानें डेट, पूजन मुहूर्त, विधि व चांद निकलने का…! https://maarmik.in/karwa-chauth-2025-when-is-karwa-chauth-know-the-date-puja-muhurta-method-and-moonrise/ https://maarmik.in/karwa-chauth-2025-when-is-karwa-chauth-know-the-date-puja-muhurta-method-and-moonrise/#respond Tue, 09 Sep 2025 16:41:45 +0000 https://maarmik.in/?p=5025 Karwa Chauth 2025: नवरात्र और दीपावली के बीच आने वाला करवा चौथ का व्रत हर सुहागिन के लिए बहुत खास होता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए बिना कुछ खाए-पिए उपवास रखती हैं और रात में चांद देखने के बाद ही व्रत खोलती हैं। इस साल करवा चौथ का व्रत […]

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Karwa Chauth 2025: नवरात्र और दीपावली के बीच आने वाला करवा चौथ का व्रत हर सुहागिन के लिए बहुत खास होता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए बिना कुछ खाए-पिए उपवास रखती हैं और रात में चांद देखने के बाद ही व्रत खोलती हैं।

इस साल करवा चौथ का व्रत 10 अक्टूबर, 2025 को रखा जाएगा। आइए जानते हैं पूजा का शुभ मुहूर्त और चांद निकलने का सही समय:

करवा चौथ 2025: तिथि और मुहूर्त

  • चतुर्थी तिथि का प्रारंभ: 9 अक्टूबर, 2025 को रात 10:54 बजे
  • चतुर्थी तिथि का समापन: 10 अक्टूबर, 2025 को शाम 07:38 बजे

उदया तिथि के अनुसार, करवा चौथ का व्रत 10 अक्टूबर को ही मनाया जाएगा।

पूजा का शुभ मुहूर्त और चांद निकलने का समय

  • पूजा का मुहूर्त: शाम 05:57 बजे से शाम 07:11 बजे तक
  • अवधि: कुल 1 घंटा 14 मिनट
  • चांद निकलने का समय: रात 08:13 बजे

करवा चौथ की पूजा विधि

इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करने के बाद सरगी का सेवन करें। इसके बाद पूरे दिन निर्जला व्रत का संकल्प लें। शाम को पूजा से पहले सोलह श्रृंगार करें।

  1. एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर उस पर माता करवा, भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमा रखें।
  2. मिट्टी के करवे में जल भरकर पूजा स्थल पर रखें।
  3. धूप, दीप, और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें।
  4. करवा चौथ की व्रत कथा सुनें।
  5. रात में चांद निकलने के बाद चंद्रमा को अर्घ्य दें।
  6. इसके बाद, छलनी से पहले चंद्रमा और फिर पति का चेहरा देखें।
  7. पति के हाथों से पानी पीकर व्रत का पारण करें और बड़ों का आशीर्वाद लें।

यह व्रत पति-पत्नी के रिश्ते को और भी मजबूत बनाता है और उनके जीवन में सुख-समृद्धि लाता है।

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