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CG Dhan Kharidi Token Issue : छत्तीसगढ़ में धान खरीदी बनी ऑनलाइन चुनौती : 27 लाख किसान कतार में, पर 3 मिनट में खत्म हो रहा टोकन स्लॉट

CG Dhan Kharidi Token Issue
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CG Dhan Kharidi Token Issue : रायपुर | छत्तीसगढ़ में इस वर्ष धान खरीदी की प्रक्रिया 27.30 लाख पंजीकृत किसानों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है, क्योंकि ऑनलाइन टोकन बुकिंग के लिए स्लॉट खुलते ही मात्र दो से तीन मिनट में खत्म हो जा रहे हैं। राजधानी के करीब सांकरा गाँव से लेकर दूरस्थ इलाकों तक के किसान टोकन नहीं मिलने से भारी परेशानी झेल रहे हैं, जिसके कारण उनके व्यक्तिगत कार्य, जैसे शादी और मकान निर्माण, समय पर पूरे नहीं हो पा रहे हैं। इस समस्या की मुख्य वजह सहकारी समितियों में रोजाना धान खरीदी की लिमिट को पिछले वर्ष के मुकाबले 15 से 25 प्रतिशत तक कम करना है।

CG Dhan Kharidi Token Issue : वर्तमान स्थिति चिंताजनक है; 15 नवंबर को शुरू हुई खरीदी में 5 दिसंबर तक केवल 4 लाख 39 हजार किसानों ने ही 22 लाख टन धान बेचा है, जबकि 23 लाख से अधिक किसान अब भी अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। किसान संघों का मानना है कि 31 जनवरी तक सभी किसानों से धान खरीदी करना असंभव होगा, क्योंकि शेष किसानों से खरीदने के लिए प्रतिदिन 46 हजार से ज्यादा किसानों से खरीदी करनी पड़ेगी, जबकि अभी यह औसत मात्र 22 हजार किसानों का है। ऐसे में राज्य सरकार को 31 जनवरी से आगे तारीख बढ़ानी पड़ सकती है।

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टोकन नहीं मिलने की इस गंभीर समस्या ने किसानों में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है। महासमुंद जिले में तो एक किसान ने इसी परेशानी के कारण आत्महत्या का प्रयास भी किया था। वहीं, दुर्ग के बेरला ब्लॉक में किसानों ने समिति प्रबंधक पर टोकन जारी करने और बिक्री के लिए 1000 से लेकर 4000 रुपए तक की अवैध वसूली करने का आरोप लगाते हुए समिति का घेराव किया। इन विरोध प्रदर्शनों के बीच, छत्तीसगढ़ राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष संदीप शर्मा ने किसानों से धैर्य रखने की अपील की है और कहा है कि वे खरीदी लिमिट बढ़ाने के लिए राज्य सरकार से चर्चा करेंगे।

इस बीच, मार्कफेड (छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ मर्यादित) के प्रबंध संचालक जितेंद्र शुक्ला ने आंशिक राहत देते हुए बताया है कि अब टोकन की वैधता 10 दिन के बजाय 20 दिनों के लिए कर दी गई है और जहाँ लिमिट बढ़ाने के प्रस्ताव मिल रहे हैं, वहाँ कलेक्टरों से बात करके लिमिट बढ़ाई जा रही है। वर्तमान में 70 प्रतिशत ऑनलाइन और 30 प्रतिशत ऑफलाइन टोकन जारी किए जा रहे हैं, लेकिन बैंक खाता या सदस्यता क्रमांक सत्यापित न होने जैसे नियमों के कारण भी कई किसान टोकन पाने से वंचित रह जाते हैं। इसके अलावा, सहकारी समितियों से धान का उठाव कमजोर होने के कारण भी खरीदी में लेटलतीफी हो रही है।

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