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CG News: किले पर कांग्रेस नेता की गुंडागर्दी, संरक्षित स्मारक में अवैध खुदाई…!

CG News: राष्ट्रीय महत्व के संरक्षित स्मारक गज किला में कांग्रेस नेता द्वारा अवैध खुदाई (Illegal Excavation) करवाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि कांग्रेस ग्रामीण जिला अध्यक्ष पद के दावेदार और पीसीसी सदस्य नीरज जायसवाल ने बिना किसी अनुमति के मजदूरों से उत्खनन कार्य कराया। मामले की शिकायत भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण (ASI) ने रतनपुर पुलिस से की, जिसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर खुदाई रुकवाई और मजदूरों से पूछताछ की।

कांग्रेस नेता पर अवैध खुदाई का आरोप

जानकारी के मुताबिक, नीरज जायसवाल द्वारा गज किला परिसर की बाउंड्री वॉल के भीतर, जो कि एएसआई द्वारा संरक्षित क्षेत्र घोषित है, खुदाई कराई जा रही थी। पुरातत्व विभाग के अधिकारी जब मौके पर पहुंचे और खुदाई रोकने को कहा, तो मजदूरों ने काम बंद करने से मना कर दिया। विभाग ने इसकी लिखित शिकायत पुलिस को दी, जिसके बाद रतनपुर पुलिस ने हस्तक्षेप कर उत्खनन रोक दिया। कुछ देर बाद नीरज जायसवाल थाने पहुंचे और माफी मांगते हुए भविष्य में ऐसी गलती न दोहराने का आश्वासन दिया। पुलिस ने चेतावनी देकर उन्हें छोड़ दिया।

कानून का उल्लंघन और सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना

पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने कहा कि यह कार्य न केवल “प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्त्विक स्थल तथा अवशेष अधिनियम, 1958” का उल्लंघन है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की भी अवहेलना है।
इस अधिनियम के तहत –

  • किसी भी संरक्षित स्मारक के 100 मीटर के दायरे में खुदाई, निर्माण या तोड़फोड़ पूरी तरह प्रतिबंधित है।

  • वहीं 200 मीटर तक की सीमा में किसी भी गतिविधि के लिए पूर्व अनुमति आवश्यक होती है।

ASI ने दी चेतावनी, FIR की तैयारी

एएसआई की शिकायत में कहा गया है कि यह घटना न केवल कानून के खिलाफ है, बल्कि प्रशासनिक प्रतिष्ठा को भी ठेस पहुंचाती है। विभाग ने आरोपी नेता को चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में दोबारा ऐसी हरकत की गई, तो एफआईआर दर्ज कर कठोर कार्रवाई की जाएगी।

गज किला: कलचुरी वंश की धरोहर

गज किला, छत्तीसगढ़ के रतनपुर में स्थित एक ऐतिहासिक स्थल है, जो कलचुरी राजवंश की शासनकालीन धरोहर के रूप में प्रसिद्ध है। इसे भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण ने राष्ट्रीय महत्व के संरक्षित स्मारक के रूप में दर्ज किया है। घटना के बाद स्थानीय लोगों और इतिहासप्रेमियों में आक्रोश है। राजनीतिक हलकों में भी सवाल उठ रहे हैं कि एक सत्ताधारी दल का नेता कानून को ताक पर रखकर संरक्षित स्थल में खुदाई करने का साहस कैसे कर सकता है।

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