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CG Teacher Job Alert : शिक्षकों की नौकरी पर संकट, 6,285 बीएड डिग्रीधारी शिक्षकों के लिए ‘ब्रिज कोर्स’ अनिवार्य, चूके तो रद्द होगी नियुक्ति

CG Teacher Job Alert
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CG Teacher Job Alert : बिलासपुर/रायपुर: छत्तीसगढ़ के प्राइमरी स्कूलों में कार्यरत बीएड (B.Ed.) डिग्रीधारी शिक्षकों के लिए बड़ी खबर है। राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (SCERT) ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए प्रदेश के 6,285 शिक्षकों के लिए 6 महीने का ब्रिज कोर्स करना अनिवार्य कर दिया है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यदि तय समय के भीतर यह कोर्स पूरा नहीं किया गया, तो शिक्षकों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ सकता है।

 CG Teacher Job Alert : किन शिक्षकों के लिए है अनिवार्य?
यह निर्देश उन शिक्षकों पर लागू होगा जिनकी नियुक्ति 28 जून 2018 से 11 अगस्त 2023 के बीच हुई है और जो वर्तमान में कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों को पढ़ा रहे हैं। एनसीटीई (NCTE) और शिक्षा मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार, प्राथमिक शिक्षा के लिए आवश्यक विशेष कौशल प्राप्त करने हेतु यह सर्टिफिकेट कोर्स जरूरी है।

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महत्वपूर्ण तारीखें और पंजीयन
ब्रिज कोर्स का संचालन नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (NIOS) के माध्यम से किया जाएगा। इसके लिए रजिस्ट्रेशन पोर्टल 24 नवंबर 2025 से 25 दिसंबर 2025 तक खुला रहेगा। शिक्षकों को सलाह दी गई है कि वे इस समयावधि के भीतर अपना पंजीयन सुनिश्चित करें।

कड़ी शर्तें और डेडलाइन
एक साल की सीमा: NIOS द्वारा पाठ्यक्रम शुरू होने के बाद इसे एक वर्ष के भीतर पूर्ण करना अनिवार्य होगा।

नौकरी का खतरा: निर्धारित समय में कोर्स पूरा न करने पर संबंधित शिक्षक की नियुक्ति रद्द मानी जाएगी।

भविष्य के लिए मान्य नहीं: यह ब्रिज कोर्स केवल वर्तमान में कार्यरत शिक्षकों की पात्रता बचाने के लिए है; इसे भविष्य की नई भर्तियों के लिए आधार नहीं माना जाएगा।

क्यों पड़ी इसकी जरूरत?
वर्ष 2023 में विज्ञापित 12,489 पदों में से 6,285 पदों पर सहायक शिक्षकों (बीएड धारकों) की नियुक्ति शर्तों के आधार पर की गई थी, क्योंकि योग्यता का मामला हाई कोर्ट में लंबित था। अब सुप्रीम कोर्ट के निर्णय और NCTE के पब्लिक नोटिस के बाद, इन नियुक्तियों को वैध बनाए रखने के लिए यह 6 महीने का प्रशिक्षण अनिवार्य हो गया है।

SCERT ने सभी जिलों के डीईओ (DEO) और डाइट प्राचार्यों को निर्देशित किया है कि वे शासकीय, अनुदान प्राप्त और निजी स्कूलों में कार्यरत ऐसे सभी शिक्षकों तक यह जानकारी पहुँचाएं ताकि किसी की सेवा प्रभावित न हो।

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