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Chhattisgarh Assembly Session : बघेल का ‘विजन 2047’ पर तीखा वार : ढकोसला बंद करो, पूर्व CM बोले, पहले शिक्षा, स्वास्थ्य और कानून व्यवस्था संभालो

 Chhattisgarh Assembly Session
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 Chhattisgarh Assembly Session : रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के शीतकालीन सत्र की शुरुआत से ठीक पहले, ‘विजन 2047’ पर होने वाली चर्चा ने सियासी पारा बढ़ा दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसे केवल ‘ध्यान भटकाने की चाल’ करार देते हुए मौजूदा सरकार पर करारा हमला बोला है। बघेल ने स्पष्ट कहा कि जब राज्य में मूलभूत सेवाओं की हालत खराब है, तो दूर की बात करना सिर्फ एक ‘ढकोसला’ है।

 Chhattisgarh Assembly Session : किसान, शिक्षा, और स्वास्थ्य व्यवस्था पर सीधा आरोप
बघेल ने अपने बयान में मौजूदा सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राज्य में धान खरीदी की व्यवस्था चरमरा गई है और टोकन न मिलने से किसानों का ‘गला काटा जा रहा है’। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह से प्रभावित हैं, और कानून व्यवस्था की स्थिति भी नियंत्रण से बाहर हो चुकी है। उनका मानना है कि ऐसी तात्कालिक और गंभीर समस्याओं के रहते 2047 के भविष्य पर चर्चा करना केवल लोगों को भ्रमित करने की रणनीति है।

एसआईआर प्रक्रिया पर संशय: ‘कितने पाकिस्तानी हैं, सूची आने पर पता चलेगा’
पूर्व सीएम ने प्रदेश में चल रही एसआईआर (SIR) प्रक्रिया को लेकर भी संशय व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि अभी केवल गणना पत्रक भरे जा रहे हैं, लेकिन सूची सामने आने के बाद ही खुलासा होगा कि वास्तव में कितने नाम काटे गए हैं। उन्होंने भाजपा पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वे हमेशा ‘बांग्लादेशी और पाकिस्तानी’ का हल्ला मचाते हैं, सूची जारी होने पर पता चलेगा कि उनकी संख्या कितनी है।

नाराजगी का विस्फोट: पुलिस-जनता टकराव पर बोले बघेल
विभिन्न जिलों में पुलिस और जनता के बीच बढ़ती टकराव की घटनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए बघेल ने कहा कि यह सरकार के प्रति हर वर्ग के आक्रोश का परिणाम है। उन्होंने कहा, “युवा, महिला, और आदिवासी—सभी सरकार से नाराज़ हैं, और यही गुस्सा अलग-अलग जिलों में फूट रहा है।”

पुराने धर्मांतरण विधेयक पर मांगा स्पष्टीकरण
विधानसभा में धर्मांतरण रोकने के लिए नया विधेयक लाए जाने की चर्चा पर बघेल ने सरकार से पिछली कार्यवाही पर स्पष्टता मांगी। उन्होंने पूछा कि जो पुराना धर्मांतरण विधेयक पारित हुआ था, वह अभी कहां अटका है—राजभवन में या राष्ट्रपति भवन में? उन्होंने सरकार से उस विधेयक की वर्तमान स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की।

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