रायपुर: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 3200 करोड़ रुपये के शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने स्पेशल कोर्ट में अपनी अंतिम चार्जशीट पेश कर दी है। 29 हजार 800 पन्नों के इस भारी-भरकम दस्तावेज में ED ने कुल 81 लोगों को आरोपी बनाया है, जिनमें से 59 नए नाम शामिल हैं। कोर्ट में चार्जशीट पेश होने के बाद अब उन रसूखदार अफसरों और कारोबारियों पर गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है, जो फिलहाल बाहर हैं।
संगठित अपराध और विदेशी निवेश का खुलासा
ED ने अपनी रिपोर्ट में सनसनीखेज दावा किया है कि इस घोटाले को एक सोची-समझी साजिश यानी ‘संगठित अपराध’ की तरह अंजाम दिया गया। घोटाले की काली कमाई को केवल देश में ही नहीं, बल्कि दुबई, नीदरलैंड और लंदन जैसे देशों में निवेश किया गया है। अधिकारियों ने अपने परिजनों और करीबियों के नाम पर विदेशी संपत्तियां खरीदी हैं।
इन दिग्गजों के इर्द-गिर्द घूमता ‘सिंडिकेट’
जांच एजेंसी के अनुसार, इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड एक सिंडिकेट था, जिसमें अनवर ढेबर, अरुणपति त्रिपाठी, अनिल टुटेजा और सौम्या चौरसिया शामिल थे। इन्होंने आबकारी नीति में बदलाव कर 15 जिलों में अपने मनपसंद अधिकारियों की पोस्टिंग कराई। ED ने पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे चैतन्य बघेल उर्फ बिट्टू को भी इस सिंडिकेट का हिस्सेदार बताया है।
बड़ी कंपनियां और रसूखदार नाम रडार पर
नई चार्जशीट में यश टुटेजा, लक्ष्मीनारायण बंसल, और नवीन केडिया समेत कई शराब कारोबारियों और आबकारी अधिकारियों के नाम शामिल हैं। साथ ही छत्तीसगढ़ डिस्टलरी, भाटिया वाइन मर्चेंट और ढेबर बिल्डकॉन जैसी बड़ी कंपनियों को भी आरोपी बनाया गया है।
आगे क्या? सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार समय पर दाखिल इस चार्जशीट में डिजिटल सबूत और बैंक ट्रांजैक्शन की पूरी डिटेल दी गई है। अब कोर्ट में ट्रायल शुरू होगा, जहां आरोपियों पर दोष तय कर गवाहों के बयान दर्ज किए जाएंगे।

