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Gol Bazar home delivery Service : गोल बाजार सीधे आपके घर : रायपुर के ऐतिहासिक व्यापार केंद्र ने बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच शुरू की होम डिलीवरी सुविधा

Gol Bazar home delivery Service
Gol Bazar home delivery Service

Gol Bazar home delivery Service : रायपुर। राजधानी रायपुर का लगभग 200 साल पुराना और ऐतिहासिक गोल बाजार अब बदलते दौर के साथ कदम मिला रहा है। बढ़ती प्रतिस्पर्धा और ग्राहकों की सुविधा को देखते हुए, गोल बाजार व्यापारी संघ ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए होम डिलीवरी सेवा शुरू करने की घोषणा की है।

Gol Bazar home delivery Service : इस पहल का उद्देश्य ग्राहकों को बेहतर सुविधा प्रदान करना और शहर के सबसे पुराने तथा किफायती व्यापारिक केंद्र के प्रति उनके भरोसे को बनाए रखना है। अब ग्राहक घर बैठे ही किराना, कपड़ा, पूजा सामग्री, स्वदेशी उत्पाद, और यहाँ तक कि दुर्लभ जड़ी-बूटियां भी आसानी से मंगा सकेंगे।

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सुविधा की खास बातें

नो मिनिमम ऑर्डर लिमिट: अधिकांश व्यापारिक सेगमेंट में न्यूनतम खरीद की कोई सीमा नहीं रखी गई है, जिससे छोटे-छोटे सामान भी ऑर्डर किए जा सकेंगे।

एक छत के नीचे सब कुछ: करीब 6 एकड़ में फैले और लगभग 1000 दुकानों वाले इस बाजार में जन्म से लेकर विवाह और मृत्यु संस्कारों तक के सभी आवश्यक सामान एक ही जगह उपलब्ध होते हैं।

मिलने वाले प्रमुख उत्पाद: किराना, मसाले, कपड़ा, पूजा सामग्री, जड़ी-बूटियां (जो शहर में यहीं सबसे ज्यादा मिलती हैं), लोहे के बर्तन, मिठाई, पटाखे, साथ ही हंडी पसरा, मिट्टी के बर्तन, पर्रा, तिल्ली-मुर्रा लड्डू, गुड़, और फलाहारी स्वदेशी उत्पाद।

सुविधा बढ़ाने का कारण: पार्किंग और प्रतिस्पर्धा

व्यापारी संगठनों का मानना है कि वर्तमान में गोल बाजार को पार्किंग की समस्या, जगह की कमी, प्रसाधन की दिक्कत और अतिक्रमण जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इन असुविधाओं के कारण ग्राहकों का यहाँ आना कुछ कम हुआ है।

मर्चेंट एसोसिएशन और व्यापारी संघ ने ग्राहकों से अपने पुराने संबंधों को बनाए रखने और आधुनिक बाज़ारों की प्रतिस्पर्धा का सामना करने के लिए यह होम डिलीवरी की पहल की है, जिससे ग्राहकों को बेहतर सुविधा मिल सके।

गोल बाजार का 200 वर्षीय इतिहास

निर्माण: इस बाजार का निर्माण लगभग 200 साल पहले भोसले राजाओं ने करवाया था।

पुराना नाम: अंग्रेज इसे मित्र बाजार के नाम से जानते थे।

नामकरण: इसकी गोलाकार बनावट के कारण ही इसका नाम ‘गोल बाजार’ पड़ा। पुराने समय में व्यापारी घोड़ों और बैलगाड़ियों से यहां सामान लेकर आते थे।

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