Khairagarh Electricity Bill Pending : खैरागढ़ : नियम और कायदे क्या सिर्फ आम आदमी की जेब ढीली करने के लिए होते हैं? यह सवाल खैरागढ़ जिले में बिजली बिल के आंकड़ों को देखकर उठ रहा है। जिले में बिजली का मीटर तो सबके लिए एक ही रफ्तार से घूम रहा है, लेकिन वसूली की सुई सिर्फ आम जनता पर आकर रुक जाती है। एक तरफ जहाँ गरीब का बिल बकाया होने पर अंधेरा छा जाता है, वहीं दूसरी तरफ रसूखदार सरकारी विभाग करोड़ों का बिल दबाए बैठे हैं और विभाग उन पर हाथ डालने से कतरा रहा है।
Khairagarh Electricity Bill Pending : आंकड़ों का खेल: जनता ‘ईमानदार’, विभाग ‘लापरवाह’
खैरागढ़ संभाग के ताजा आंकड़े चौंकाने वाले हैं। जहाँ क्षेत्र के 33 हजार निजी उपभोक्ताओं पर मात्र 4 करोड़ रुपये का बकाया है, वहीं महज 50 सरकारी विभागों ने बिजली विभाग का 20 करोड़ रुपये से अधिक का चूना लगा रखा है। यानी कि जनता से 5 गुना ज्यादा उधारी सरकार के अपने विभागों की है।
बकायादारों की लिस्ट: पंचायत और निकाय सबसे आगे
बिजली बिल न भरने की रेस में सबसे आगे नगरीय प्रशासन और पंचायत विभाग हैं।
ग्राम पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग: 10.50 करोड़ रुपये का बकाया।
नगरीय निकाय: 8.33 करोड़ रुपये का लंबित बिल। इसके अलावा शिक्षा, स्वास्थ्य, वन और जल संसाधन जैसे विभाग भी करोड़ों की उधारी की लिस्ट में शामिल हैं। आलम यह है कि पिछले एक साल से नोटिस पर नोटिस भेजे जा रहे हैं, लेकिन वसूली के नाम पर ढाक के वही तीन पात हैं।
सवाल बराबरी का: क्या रसूखदारों के लिए नियम अलग हैं?
यह स्थिति न केवल प्रशासनिक विफलता को दर्शाती है, बल्कि बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाती है।
कार्रवाई में भेदभाव: एक आम आदमी का बिल 2 महीने न भरे तो कनेक्शन काट दिया जाता है। क्या बिजली विभाग में इतनी हिम्मत है कि वह करोड़ों का बिल दबाए बैठे कलेक्ट्रेट या पंचायत कार्यालय की बत्ती गुल कर सके?
प्रशासनिक चुनौती: खैरागढ़ प्रशासन और बिजली विभाग के लिए यह बड़ी चुनौती है कि वे जनता को ‘समानता’ का भरोसा दिलाएं।
विभाग का पक्ष: “प्रयास जारी हैं”
बिजली विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वे लगातार सरकारी विभागों से पत्राचार कर रहे हैं। बजट आवंटन की कमी का बहाना बनाकर विभाग अक्सर भुगतान टाल देते हैं। लेकिन सवाल वही है—क्या बजट की कमी सिर्फ सरकारी विभागों के लिए है? क्या आम आदमी की आर्थिक तंगी उसे बिजली बिल से राहत दिला सकती है?

