Raigarh News : रायगढ़: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में हाथियों और इंसानों के बीच चल रहा संघर्ष अब धान खरीदी केंद्रों तक पहुँच गया है। बंगुरसिया स्थित धान खरीदी केंद्र में पिछले दो दिनों से हाथियों का एक झुंड जमकर उत्पात मचा रहा है। हाथियों ने न केवल किसानों की मेहनत से उपजी धान की करीब 15 बोरियों को अपना निवाला बना लिया, बल्कि कई अन्य बोरियों को फाड़कर धान को जमीन पर फैलाकर पूरी तरह बर्बाद कर दिया। इस घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
Raigarh News : सीसीटीवी में कैद हुआ ‘गजराज’ का आतंक
देर रात जब पूरा इलाका सो रहा था, तब हाथियों का दल चुपचाप धान खरीदी केंद्र के परिसर में दाखिल हुआ। केंद्र में खुले में रखी धान की खुशबू ने हाथियों को आकर्षित किया। इसके बाद हाथियों ने बेखौफ होकर बोरियां उठाईं और धान खाना शुरू कर दिया। वहां लगे सीसीटीवी कैमरों में यह पूरी घटना कैद हो गई है, जिसमें देखा जा सकता है कि हाथी किस तरह बिना किसी डर के धान की बोरियों को नुकसान पहुँचा रहे हैं।
धान की खुशबू खींच लाई हाथियों को
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जैसे ही धान खरीदी का सीजन शुरू हुआ है, जंगलों से निकलकर हाथियों का रुख रिहायशी इलाकों और खरीदी केंद्रों की तरफ बढ़ गया है। बंगुरसिया केंद्र के आसपास घना वन क्षेत्र होने के कारण हाथियों के लिए यहाँ तक पहुँचना बहुत आसान है। रात के समय हाथियों की मौजूदगी से किसानों और केंद्र के कर्मचारियों में भारी दहशत है। लोग अब शाम ढलते ही केंद्र की ओर जाने से कतराने लगे हैं।
लापरवाही और सुरक्षा पर उठे सवाल
इस घटना ने धान खरीदी केंद्र की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। किसानों का आरोप है कि करोड़ों रुपये की धान खुले आसमान के नीचे बिना किसी ठोस सुरक्षा के रखी गई है। केंद्र के चारों ओर न तो हाथियों को रोकने के लिए कोई मजबूत बाड़ है और न ही रात में निगरानी के लिए पर्याप्त इंतजाम। किसानों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि उनकी कड़ी मेहनत की फसल को जंगली जानवर बर्बाद कर रहे हैं और प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।
किसानों की मांग: सुरक्षा नहीं तो आंदोलन
परेशान किसानों और ग्रामीणों ने वन विभाग और जिला प्रशासन से तत्काल मदद की गुहार लगाई है। उनकी मांग है कि:
खरीदी केंद्र के चारों ओर सोलर फेंसिंग (बिजली की बाड़) लगाई जाए।
रात के समय वन विभाग की टीम की नियमित गश्त सुनिश्चित की जाए।
हाथियों को भगाने के लिए सर्च लाइट और पटाखों का इंतजाम हो।
नुकसान हुई धान का उचित मुआवजा दिया जाए।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए, तो किसी बड़ी जनहानि की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। अब देखना होगा कि वन विभाग हाथियों को रिहायशी इलाकों से दूर रखने के लिए क्या रणनीति अपनाता है।

