Raipur News: राजधानी की एनआईटी रोड स्थित चौपाटी को आमानाका ओवरब्रिज के नीचे शिफ्ट करने की योजना एक बार फिर विवादों में घिर गई है। रेलवे ने जिस स्थान पर चौपाटी शिफ्ट की जानी थी, उसे अपनी भूमि बताते हुए वहां मौजूद गुमटी, ठेले और दुकानों को हटाने का नोटिस जारी किया है। दुकानदारों को 7 दिनों के भीतर स्थान खाली करने का निर्देश दिया गया है।
32 मैकेनिक और अस्थायी दुकानदारों पर संकट
रेलवे की इस कार्रवाई से ब्रिज के नीचे वर्षों से दुकान चला रहे 32 मैकेनिक दुकानदारों सहित अन्य अस्थायी ठेलेवालों में भारी चिंता है। दुकानदारों का कहना है कि चौपाटी शिफ्टिंग पहले ही देरी से चल रही थी, और अब रेलवे नोटिस से उनकी दिक्कतें और बढ़ गई हैं।
महापौर ने फिलहाल प्रक्रिया रोकी
महापौर मीनल चौबे ने बताया कि रेलवे द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद फिलहाल चौपाटी शिफ्टिंग प्रक्रिया रोक दी गई है। नगर निगम अब रेलवे प्रशासन से बातचीत कर समाधान निकालने की दिशा में आगे बढ़ेगा।
नालंदा-2 प्रोजेक्ट पर भी संकट
करीब 10 करोड़ की लागत से विकसित चौपाटी को लेकर शुरू से विवाद रहा है। 2023 में भाजपा सरकार बनने के बाद चौपाटी हटाकर वहां नालंदा-2 पुस्तकालय और अध्ययन केंद्र बनाने की योजना बनाई गई थी।
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टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी
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15 नवंबर से चौपाटी शिफ्टिंग की तारीख तय थी
लेकिन इससे पहले ही रेलवे ने आमानाका ओवरब्रिज के नीचे बैठने वाले 32 दुकानदारों को नोटिस थमाकर जमीन पर स्वामित्व का दावा पेश कर दिया, जिससे पूरे प्रोजेक्ट पर अनिश्चितता गहरा गई है।
रेलवे का स्पष्ट बयान : जमीन हमारी, निगम ने नहीं दी जानकारी
रेलवे अधिकारियों के अनुसार—
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जिस जगह चौपाटी को स्थानांतरित किया जाना था, वह जमीन रेलवे की है
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नगर निगम ने इस संबंध में कोई आधिकारिक सूचना नहीं दी
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रेलवे पहले से ही उस जमीन पर पार्किंग विकसित करने की योजना बना चुका है
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वर्तमान में बैठे दुकानदारों को हटाना आवश्यक है, इसलिए नोटिस दिया गया
महापौर का बयान : रेलवे से होगी चर्चा
महापौर मीनल चौबे ने कहा कि नोटिस की जानकारी मिलते ही नगर निगम स्थिति को समझने में जुट गया है। रेलवे से चर्चा कर समाधान निकाला जाएगा और उसके बाद ही चौपाटी शिफ्टिंग की आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।

