bastar tourism Archives - Maarmik.in https://maarmik.in/tag/bastar-tourism/ खबरों का नया दृष्टिकोण Wed, 03 Dec 2025 12:04:33 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.1 https://maarmik.in/wp-content/uploads/2025/06/cropped-m-logo-scaled-1-32x32.png bastar tourism Archives - Maarmik.in https://maarmik.in/tag/bastar-tourism/ 32 32 Jagdalpur News : 20 साल बाद कैद से आज़ाद लिसा की दास्तान : डर ने छीनी आवाज़, अंधेरे ने निगला बचपन, पढ़े रूह कपा देने वाली पूरी खबर https://maarmik.in/jagdalpur-news-lisas-story-freed-from-captivity-after-20-years-fear-took-away-her-voice-darkness-swallowed-her-childhood-read-the-full-chilling-story/ https://maarmik.in/jagdalpur-news-lisas-story-freed-from-captivity-after-20-years-fear-took-away-her-voice-darkness-swallowed-her-childhood-read-the-full-chilling-story/#respond Wed, 03 Dec 2025 12:04:33 +0000 https://maarmik.in/?p=6385 Jagdalpur News : जगदलपुर (बकावंड)। यह कहानी केवल एक लड़की की नहीं, बल्कि उस दर्दनाक मजबूरी की है जिसने एक पिता को अपनी छह साल की मासूम बेटी को बीस साल तक अंधेरे कमरे में कैद करने पर मजबूर कर दिया। इंसानी दरिंदगी के डर ने जगदलपुर की लिसा का बचपन छीन लिया, उसकी दुनिया […]

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Jagdalpur News : जगदलपुर (बकावंड)। यह कहानी केवल एक लड़की की नहीं, बल्कि उस दर्दनाक मजबूरी की है जिसने एक पिता को अपनी छह साल की मासूम बेटी को बीस साल तक अंधेरे कमरे में कैद करने पर मजबूर कर दिया। इंसानी दरिंदगी के डर ने जगदलपुर की लिसा का बचपन छीन लिया, उसकी दुनिया को एक बंद दरवाजे के पीछे समेट दिया।

Jagdalpur News : डर की दीवार और बीस साल की खामोशी

लिसा जब महज छह साल की थी, तब बकावंड में रहने वाले एक बदमाश की बुरी नजर उस पर पड़ी। माँ का साया उठ चुका था, और गरीब पिता के पास अपनी बच्ची को बचाने का कोई रास्ता नहीं था। जिस पिता का फर्ज बेटी को दुनिया दिखाना था, उसी ने एक खौफनाक निर्णय लिया—उस दरिंदे से बचाने के लिए अपनी बेटी को घर के अंदर ही कैद कर दिया।

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अगले बीस सालों तक, लिसा की दुनिया बस वह बंद कमरा था। दरवाजा ही उसका संवाद था और दरवाजे के नीचे से सरकाया गया खाना ही उसकी खुराक। बाहर की आवाज़ें, सूरज की रोशनी, और खुली हवा—ये सब उसके लिए किताबी बातें थीं।

रोशनी लौटी, पर आँखें खो गईं

जब हाल ही में समाज कल्याण विभाग की टीम ने उस दरवाजे पर दस्तक दी, तो अंदर का नज़ारा हृदय विदारक था। बीस साल तक लगातार अंधेरे में रहने के कारण, लिसा अपनी आँखों की रोशनी खो चुकी थी। वह अब दुनिया को नहीं देख सकती। जिस बचपन को बचाने की कोशिश की गई, वह पूरी तरह से कैद हो चुका था, और आज़ादी मिलने पर भी, उसकी दुनिया में केवल कालापन था।

‘घरौंदा आश्रम’ में जीवन की नई भोर

फिलहाल, लिसा को ‘घरौंदा आश्रम’ लाया गया है, जहाँ उसे देखभाल, इलाज और सबसे ज़रूरी—इंसानियत मिल रही है। यह उसके लिए एक नई शुरुआत है। वह अब धीरे-धीरे मुस्कुराना सीख रही है, सहारा लेकर चलना सीख रही है, और वर्षों की खामोशी के बाद बोलना सीख रही है। सबसे बड़ी बात, वह जीना सीख रही है।

लिसा की कहानी एक गहरा सवाल छोड़ जाती है: क्या हमारा समाज इतना असुरक्षित हो चुका है कि एक पिता को अपनी बेटी को बचाने के लिए उसे दुनिया से ही छिपा देना पड़े? लिसा के लिए यह आश्रम अब बचपन की उस कमी को भरने की कोशिश कर रहा है, जिसे दरिंदगी के डर ने छीन लिया था।

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विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरे का शुभारंभ, छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक गर्व का प्रतीक…! https://maarmik.in/world-famous-bastar-dussehra-inaugurated/ https://maarmik.in/world-famous-bastar-dussehra-inaugurated/#respond Thu, 24 Jul 2025 08:03:05 +0000 https://maarmik.in/?p=4324 रायपुर/दंतेवाड़ा। छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में आज हरेली अमावस्या के शुभ अवसर पर पाट जात्रा पूजा विधान के साथ विश्वप्रसिद्ध ऐतिहासिक बस्तर दशहरा पर्व का शुभारंभ हो गया। दंतेवाड़ा के मां दंतेश्वरी मंदिर प्रांगण में पारंपरिक मांझी-चालकी, पुजारी, पटेल, नाईक-पाईक सहित सेवादारों द्वारा रथ निर्माण की ठुरलू खोटला रस्म पूरी श्रद्धा से संपन्न की गई। […]

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रायपुर/दंतेवाड़ा। छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में आज हरेली अमावस्या के शुभ अवसर पर पाट जात्रा पूजा विधान के साथ विश्वप्रसिद्ध ऐतिहासिक बस्तर दशहरा पर्व का शुभारंभ हो गया। दंतेवाड़ा के मां दंतेश्वरी मंदिर प्रांगण में पारंपरिक मांझी-चालकी, पुजारी, पटेल, नाईक-पाईक सहित सेवादारों द्वारा रथ निर्माण की ठुरलू खोटला रस्म पूरी श्रद्धा से संपन्न की गई। इस अवसर पर बस्तर दशहरा समिति ने क्षेत्रीय नागरिकों एवं ग्रामीणों से अपील की कि वे पूजा विधान में शामिल होकर परंपरा और संस्कृति का हिस्सा बनें।

यह 75 दिवसीय पर्व पूरी तरह मां दंतेश्वरी को समर्पित है, जिसमें 05 सितंबर से लेकर 07 अक्टूबर तक विभिन्न अनुष्ठानों की श्रृंखला चलेगी। इसमें डेरी गड़ाई, काछनगादी, कलश स्थापना, नवरात्रि पूजन, रथ परिक्रमा, मुरिया दरबार, कुटुम्ब जात्रा और अंत में मावली माता की डोली विदाई जैसे महत्वपूर्ण पूजा विधान शामिल हैं। बस्तर दशहरा केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि जनजातीय परंपराओं, समरसता और छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक गर्व का प्रतीक बन गया है।

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