Bilaspur High Court Archives - Maarmik.in https://maarmik.in/tag/bilaspur-high-court/ खबरों का नया दृष्टिकोण Mon, 03 Nov 2025 11:57:58 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.1 https://maarmik.in/wp-content/uploads/2025/06/cropped-m-logo-scaled-1-32x32.png Bilaspur High Court Archives - Maarmik.in https://maarmik.in/tag/bilaspur-high-court/ 32 32 CG Liquor Scam: चैतन्य बघेल की जमानत याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई, ईडी को नोटिस…! https://maarmik.in/cg-liquor-scam-high-court-to-hear-chaitanya-baghels-bail/ https://maarmik.in/cg-liquor-scam-high-court-to-hear-chaitanya-baghels-bail/#respond Mon, 03 Nov 2025 11:47:37 +0000 https://maarmik.in/?p=5803 CG Liquor Scam: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में जेल में बंद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की जमानत याचिका पर आज हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है। इस प्रकरण की अगली सुनवाई 18 नवंबर 2025 को होगी। सुप्रीम कोर्ट […]

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CG Liquor Scam: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में जेल में बंद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की जमानत याचिका पर आज हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है। इस प्रकरण की अगली सुनवाई 18 नवंबर 2025 को होगी।

सुप्रीम कोर्ट में भी हुई थी अहम सुनवाई

इससे पहले 31 अक्टूबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट में भी चैतन्य बघेल की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई थी।

  • सुनवाई जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ में हुई।

  • कपिल सिब्बल और एन. हरिहरन ने चैतन्य बघेल की ओर से पैरवी की।

  • ASG एस.वी. राजू ने ईडी की ओर से पक्ष रखा।

  • सुप्रीम कोर्ट ने ईडी को 10 दिन के भीतर काउंटर एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया था।

जन्मदिन पर हुई थी गिरफ्तारी

ईडी ने 18 जुलाई 2025 को चैतन्य बघेल को उनके भिलाई निवास से गिरफ्तार किया था — वही दिन उनका जन्मदिन भी था। गिरफ्तारी धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की गई। ईडी की जांच एसीबी/ईओडब्ल्यू रायपुर द्वारा दर्ज एफआईआर पर आधारित है, जिसमें आईपीसी की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत अपराध दर्ज हैं। जांच के मुताबिक, इस घोटाले से प्रदेश को भारी आर्थिक नुकसान हुआ और करीब ₹2,500 करोड़ की अवैध कमाई (POC) विभिन्न लाभार्थियों तक पहुंचाई गई।

ईडी का दावा — चैतन्य बघेल को मिले 16.70 करोड़ रुपये

ईडी की जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि चैतन्य बघेल को 16.70 करोड़ रुपये नगद प्राप्त हुए। यह राशि उन्होंने अपनी रियल एस्टेट फर्मों के प्रोजेक्ट्स में लगाई।
रिपोर्ट के अनुसार —

  • ठेकेदारों को नकद भुगतान किया गया।

  • बैंक ट्रांजैक्शन में नकद के बदले प्रविष्टियाँ की गईं।

  • त्रिलोक सिंह ढिल्लों के साथ मिलकर एक वित्तीय योजना (फर्जी निवेश योजना) तैयार की गई।

  • “विठ्ठलपुरम प्रोजेक्ट” में फर्जी फ्लैट खरीद के माध्यम से ₹5 करोड़ रुपये प्राप्त किए गए।

बैंकिंग रिकॉर्ड्स से यह भी स्पष्ट हुआ कि संबंधित अवधि में त्रिलोक सिंह ढिल्लों के खातों में शराब सिंडिकेट से रकम जमा हुई थी।

मामले में पहले से कई बड़े नाम गिरफ्त में

ईडी ने इस घोटाले में अब तक कई प्रभावशाली लोगों को गिरफ्तार किया है —

  • पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा

  • अरविंद सिंह

  • त्रिलोक सिंह ढिल्लों

  • अनवर ढेबर

  • आईटीएस अधिकारी अरुण पति त्रिपाठी

  • पूर्व मंत्री और वर्तमान विधायक कवासी लखमा

ईडी के अनुसार, शराब बिक्री से अवैध वसूली का एक संगठित नेटवर्क संचालित किया जा रहा था, जिसकी जांच अभी जारी है।

अगली तारीख

अब इस मामले में अगली सुनवाई 18 नवंबर 2025 को होगी, जिसमें ईडी का जवाब पेश किया जाएगा और जमानत याचिका पर आगे की दलीलें सुनी जाएंगी।

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भूपेश बघेल बनाम विजय बघेल, हाईकोर्ट में बहस के बाद फैसला सुरक्षित https://maarmik.in/bhupesh-baghel-vs-vijay-baghel/ https://maarmik.in/bhupesh-baghel-vs-vijay-baghel/#respond Tue, 14 Oct 2025 19:05:36 +0000 https://maarmik.in/?p=5646 बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में अहम मोड़ लाने वाले एक बड़े मामले में बिलासपुर हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के खिलाफ दायर चुनाव याचिका पर सुनवाई पूरी कर ली है और फैसला सुरक्षित रख लिया है। यह मामला विधानसभा चुनाव 2023 के दौरान आचार संहिता उल्लंघन से जुड़ा है। अब इस पर कभी भी […]

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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में अहम मोड़ लाने वाले एक बड़े मामले में बिलासपुर हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के खिलाफ दायर चुनाव याचिका पर सुनवाई पूरी कर ली है और फैसला सुरक्षित रख लिया है। यह मामला विधानसभा चुनाव 2023 के दौरान आचार संहिता उल्लंघन से जुड़ा है। अब इस पर कभी भी हाईकोर्ट का बड़ा फैसला आ सकता है।

यह याचिका दुर्ग के सांसद और भाजपा नेता विजय बघेल ने दायर की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि पाटन विधानसभा क्षेत्र में चुनाव प्रचार अवधि समाप्त होने के बाद भी भूपेश बघेल ने रैली और रोड शो किया, जो आचार संहिता का उल्लंघन है। विजय बघेल ने अदालत में फोटो और वीडियो सबूत भी पेश किए हैं, जिनमें कथित रूप से भूपेश बघेल को मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए वोट मांगते हुए दिखाया गया है।

याचिका के अनुसार, चुनाव आयोग ने दूसरे चरण के मतदान से पहले 15 नवंबर की शाम 5 बजे प्रचार समाप्त करने का निर्देश दिया था, लेकिन अगले दिन यानी 16 नवंबर 2023 को पाटन में भूपेश बघेल ने सार्वजनिक सभा की। आरोप है कि इस कार्यक्रम में न सिर्फ कांग्रेस कार्यकर्ता बल्कि सरकारी अधिकारी और पुलिसकर्मी भी शामिल थे। भाजपा पक्ष का कहना है कि यह न केवल चुनाव नियमों का उल्लंघन है बल्कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के तहत भी अपराध है।

भूपेश बघेल की ओर से अदालत में 16 बिंदुओं पर लिखित जवाब दिया गया है। उनके वकीलों ने कहा कि विजय बघेल की याचिका में ठोस साक्ष्य नहीं हैं और यह मामला राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि जिस कार्यक्रम को चुनावी प्रचार बताया जा रहा है, वह एक सामाजिक कार्यक्रम था, जिसका राजनीति से कोई संबंध नहीं था। साथ ही, वीडियो और फोटो को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है।

हाईकोर्ट में मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने अपनी दलीलें रखीं। भाजपा पक्ष ने तर्क दिया कि मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए आचार संहिता का उल्लंघन लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है, जबकि भूपेश बघेल की ओर से कहा गया कि निर्वाचन आयोग ने पहले इस पर कोई कार्रवाई आवश्यक नहीं समझी थी।

सभी दलीलों को सुनने के बाद हाईकोर्ट की एकल पीठ ने निर्णय को सुरक्षित रख लिया है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस पर महत्वपूर्ण फैसला आ सकता है, जो छत्तीसगढ़ की राजनीति पर बड़ा असर डालेगा।

यह मामला केवल कानूनी नहीं बल्कि भूपेश बनाम विजय बघेल की पारिवारिक और राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का भी प्रतीक बन गया है। दोनों नेता रिश्ते में चचेरे भाई हैं, लेकिन राजनीतिक तौर पर कट्टर विरोधी हैं। 2023 के चुनाव में पाटन सीट पर दोनों के बीच कड़ी टक्कर हुई थी, जिसमें भूपेश बघेल ने विजय बघेल को संकरी बढ़त से हराया था। चुनाव के बाद से यह सीट और यह विवाद लगातार राज्य की राजनीति के केंद्र में बना हुआ है।

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