chhattisgarh education news Archives - Maarmik.in https://maarmik.in/tag/chhattisgarh-education-news/ खबरों का नया दृष्टिकोण Thu, 25 Dec 2025 04:54:53 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.1 https://maarmik.in/wp-content/uploads/2025/06/cropped-m-logo-scaled-1-32x32.png chhattisgarh education news Archives - Maarmik.in https://maarmik.in/tag/chhattisgarh-education-news/ 32 32 Chhattisgarh Teacher News : आदेश को ठेंगा दिखाने वाले शिक्षकों पर गिरेगी गाज… https://maarmik.in/chhattisgarh-teacher-news/ https://maarmik.in/chhattisgarh-teacher-news/#respond Thu, 25 Dec 2025 04:54:53 +0000 https://maarmik.in/?p=7114 Chhattisgarh Teacher News : रायपुर। छत्तीसगढ़ शिक्षा विभाग में युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया को बीते छह महीने बीत चुके हैं, लेकिन आदेश की अवहेलना करने वाले शिक्षकों पर अब गाज गिरने वाली है। रायपुर संभाग के 11 मिडिल स्कूल और 9 प्राइमरी स्कूल के शिक्षकों ने अभ्यावेदन (Representation) खारिज होने के बावजूद नए स्कूलों में कार्यभार […]

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Chhattisgarh Teacher News : रायपुर। छत्तीसगढ़ शिक्षा विभाग में युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया को बीते छह महीने बीत चुके हैं, लेकिन आदेश की अवहेलना करने वाले शिक्षकों पर अब गाज गिरने वाली है। रायपुर संभाग के 11 मिडिल स्कूल और 9 प्राइमरी स्कूल के शिक्षकों ने अभ्यावेदन (Representation) खारिज होने के बावजूद नए स्कूलों में कार्यभार ग्रहण नहीं किया है। इसे ‘गंभीर अनुशासनहीनता’ मानते हुए संयुक्त संचालक (JD) ने कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

Chhattisgarh Teacher News : प्रमुख बिंदु: क्यों बढ़ी शिक्षकों की मुश्किलें?
निलंबन नहीं, सीधे सेवा समाप्ति की तैयारी: विभाग का मानना है कि निलंबित करने से शिक्षकों को घर बैठे आधा वेतन मिलता है, जो उनके लिए फायदेमंद हो जाता है। इसलिए अब प्रशासन उन्हें बर्खास्त (Dismiss) करने या ब्रेक-इन-सर्विस (सेवा में व्यवधान) जैसी कठोर कार्रवाई की तैयारी में है।

बच्चों की पढ़ाई हो रही प्रभावित: इन शिक्षकों की जिद के कारण एकल शिक्षकीय या शिक्षक विहीन स्कूलों में पढ़ाई ठप है।

जांच दल का गठन: जेडी आरपी आदित्य ने डीईओ (DEO) और बीईओ (BEO) को जांच का जिम्मा सौंपा है। टीम इन शिक्षकों की अनुपस्थिति और आदेशों की अवहेलना पर विस्तृत रिपोर्ट देगी।

कोर्ट से नहीं मिली राहत: कई शिक्षक इस प्रक्रिया के खिलाफ हाईकोर्ट गए थे, लेकिन वहां से अभ्यावेदन खारिज होने के बाद भी उन्होंने जॉइनिंग नहीं दी।

इन पर गिरेगी गाज:
मिडिल स्कूल के 11 शिक्षक: जिनका वेतन पहले ही रोका जा चुका है, पर वे स्कूल नहीं पहुंचे।

प्राइमरी स्कूल के 9 सहायक शिक्षक: जिनके खिलाफ डीईओ को तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

अधिकारी का पक्ष: संयुक्त संचालक आरपी आदित्य के अनुसार, शासन के आदेशों की अवहेलना बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जो शिक्षक दूर-दराज के स्कूलों में जाने से बच रहे हैं, उनके खिलाफ ऐसी कार्रवाई की अनुशंसा की जाएगी जिससे उनकी नौकरी भी जा सकती है।

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CG Professor Dog Duty : शिक्षक के बाद अब कॉलेज व यूनिवर्सिटी के प्रोफेसरों की लगी कुत्तों की निगरानी की ड्यूटी https://maarmik.in/cg-professor-dog-duty/ https://maarmik.in/cg-professor-dog-duty/#respond Mon, 15 Dec 2025 10:43:14 +0000 https://maarmik.in/?p=6806 CG Professor Dog Duty : रायपुर (छत्तीसगढ़): छत्तीसगढ़ में शिक्षा जगत से जुड़ी एक और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। स्कूल शिक्षकों को आवारा पशुओं की निगरानी का काम सौंपने के बाद, अब उच्च शिक्षा विभाग ने कॉलेज और यूनिवर्सिटी के प्रोफेसरों को भी इसी जिम्मेदारी में लगा दिया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश […]

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CG Professor Dog Duty : रायपुर (छत्तीसगढ़): छत्तीसगढ़ में शिक्षा जगत से जुड़ी एक और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। स्कूल शिक्षकों को आवारा पशुओं की निगरानी का काम सौंपने के बाद, अब उच्च शिक्षा विभाग ने कॉलेज और यूनिवर्सिटी के प्रोफेसरों को भी इसी जिम्मेदारी में लगा दिया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए विभाग ने एक नया निर्देश जारी किया है, जिसके तहत प्रदेश के सरकारी और प्राइवेट दोनों तरह के उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए यह ड्यूटी अनिवार्य होगी।

CG Professor Dog Duty : प्रोफेसरों को क्यों मिली यह अजीब जिम्मेदारी?
उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि कॉलेज और यूनिवर्सिटी कैंपस में आवारा कुत्तों के नियंत्रण, निगरानी और उनसे होने वाली संभावित घटनाओं की रोकथाम की सीधी जिम्मेदारी अब संबंधित संस्थान की होगी। इस काम के लिए प्रोफेसरों को नोडल अधिकारी के रूप में नियुक्त किया जाएगा।

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नोडल अधिकारी की मुख्य जिम्मेदारियां:

स्थानीय समन्वय: नोडल अधिकारी को स्थानीय प्रशासन, नगर निगम, नगर पालिका या परिषद से लगातार संपर्क बनाए रखना होगा।

हटाने की कार्रवाई: कैम्पस में कोई भी आवारा कुत्ता या पशु नजर आने पर तुरंत स्थानीय निकाय से संपर्क करके उन्हें हटवाने का प्रयास करना होगा।

रिपोर्टिंग: ये नोडल अधिकारी सीधे प्रदेश स्तर पर बनाए गए नोडल अधिकारी (डॉ. टी. जलजा नायर) को रिपोर्ट करेंगे।

सुविधाएं: कैम्पस को स्वच्छ रखना, खाद्य सामग्री को खुले में न रखना (ताकि पशु आकर्षित न हों), और परिसर की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी इनकी जिम्मेदारी होगी।

आदेश का सख्त पालन सुनिश्चित करने के लिए ‘व्हाट्सएप ड्यूटी’
यह सुनिश्चित करने के लिए कि निर्देशों का गंभीरता से पालन हो रहा है, विभाग ने एक अभिनव (और सख्त) तरीका अपनाया है।

डिस्प्ले बोर्ड अनिवार्य: कॉलेज और यूनिवर्सिटी को नोडल अधिकारी का नाम, मोबाइल नंबर, और सहायता के लिए हेल्पलाइन (1100) की जानकारी के साथ एक डिस्प्ले बोर्ड लगाना अनिवार्य होगा।

फोटो सबूत: नोडल अधिकारी को इस डिस्प्ले बोर्ड की फोटो खींचकर उच्च शिक्षा संचालनालय द्वारा जारी किए गए मोबाइल नंबर पर व्हाट्सएप के माध्यम से भेजनी होगी।

यह प्रक्रिया यह सुनिश्चित करेगी कि आदेश केवल कागजों पर न रहे, बल्कि जमीनी स्तर पर लागू हो।

सुरक्षा के अन्य निर्देश
प्रोफेसरों की ड्यूटी लगाने के साथ ही, उच्च शिक्षा विभाग ने अन्य सुरक्षात्मक उपायों पर भी जोर दिया है:

फर्स्ट-एड बॉक्स: प्रत्येक संस्थान में फर्स्ट-एड बॉक्स की उपलब्धता अनिवार्य की गई है।

परिसर सुरक्षा: जहां संभव हो, कैंपस की चारदीवारी को सुरक्षित और मजबूत बनाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि आवारा पशुओं का प्रवेश पूरी तरह रोका जा सके।

हेल्पलाइन प्रचार: किसी भी आपात स्थिति में सहायता के लिए राज्य की हेल्पलाइन नंबर 1100 का व्यापक प्रचार-प्रसार करना अनिवार्य है।

यह फैसला 08 दिसंबर 2025 को हाई कोर्ट के स्वत: संज्ञान में ली गई जनहित याचिका की सुनवाई के संबंध में आयोजित एक उच्च-स्तरीय बैठक के बाद लिया गया है। अब उच्च शिक्षण संस्थानों के प्रोफेसरों को अध्यापन कार्य के साथ-साथ कैंपस की ‘पशु-सुरक्षा व्यवस्था’ भी संभालनी होगी।

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DPI new order Chhattisgarh : अब साँप-बिच्छू भी संभालेंगे टीचर, DPI का अजब फरमान…पढ़े पूरी खबर https://maarmik.in/dpi-new-order-chhattisgarh/ https://maarmik.in/dpi-new-order-chhattisgarh/#respond Wed, 10 Dec 2025 10:28:40 +0000 https://maarmik.in/?p=6653 DPI new order Chhattisgarh : रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी शिक्षकों को लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने एक ऐसी नई जिम्मेदारी सौंपी है, जिसने शिक्षा जगत में हड़कंप मचा दिया है। DPI ने ताज़ा निर्देश जारी करते हुए अब शिक्षकों को स्कूल परिसर में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवारा कुत्तों के साथ-साथ साँप, […]

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DPI new order Chhattisgarh : रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी शिक्षकों को लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने एक ऐसी नई जिम्मेदारी सौंपी है, जिसने शिक्षा जगत में हड़कंप मचा दिया है। DPI ने ताज़ा निर्देश जारी करते हुए अब शिक्षकों को स्कूल परिसर में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवारा कुत्तों के साथ-साथ साँप, बिच्छू और अन्य जहरीले जीव-जंतुओं की आवाजाही पर भी पैनी नज़र रखने और उन्हें रोकने का जिम्मा दिया है।

DPI new order Chhattisgarh : DPI ने इस आदेश के पीछे सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का हवाला दिया है, जिसके तहत स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अनिवार्य है। यह निर्देश प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों, प्राचार्यों और प्रधान पाठकों को भेजा गया है।

शिक्षक संगठनों में भारी नाराज़गी: ‘यह अव्यावहारिक और बेतुका है’
इस नए और अप्रत्याशित निर्देश को लेकर स्कूल प्राचार्यों और शिक्षकों में गहरी नाराज़गी देखने को मिल रही है। उनका साफ कहना है कि साँप-बिच्छू जैसे जहरीले जीवों को रोकना शिक्षकों के बूते की बात नहीं है, और यह आदेश सीधे तौर पर उनकी अपनी सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करता है।

शिक्षक संगठनों ने DPI के इस आदेश को ‘अव्यावहारिक और बेतुका’ बताते हुए कड़ा विरोध किया है। उन्होंने तीखा सवाल उठाया है कि जब शिक्षक ऐसे जहरीले जीवों से जूझ रहे होंगे, तो उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा?

overburdened बढ़ता गैर-शैक्षणिक बोझ: शिक्षक बन गए मल्टीटास्किंग कर्मचारी
शिक्षकों ने DPI के इस नए आदेश को पहले से ही उन पर डाले गए अतिरिक्त और गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारियों की लंबी सूची में एक और इजाफा बताया है। शिक्षकों पर पहले से ही बच्चों के नदी-तालाब की ओर जाने पर दुर्घटना की जिम्मेदारी, जर्जर भवन से चोट लगने पर जवाबदेही, मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता, बच्चों का आधार आईडी, जाति प्रमाण पत्र, एसआईआर (SIR) फॉर्म और स्मार्ट कार्ड बनवाने तक का जिम्मा है।

शिक्षकों का दर्द यह है कि शिक्षण कार्य से अधिक समय अब गैर-शैक्षणिक कार्यों में जा रहा है, और अब तो उन्हें ‘जीव-जंतु नियंत्रण अधिकारी’ की भूमिका भी निभानी पड़ रही है। उनका कहना है कि इस लगातार बढ़ते बोझ के कारण बच्चों का शैक्षणिक नुकसान हो रहा है, जिसका सीधा असर राज्य की शिक्षा गुणवत्ता पर पड़ेगा।

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Breaking News: छात्रावास में 3 छात्राएं बेहोश, अधीक्षिका ने टोटका करवाया…! https://maarmik.in/breaking-news-3-girl-students-faint-in-hostel-superintendent-got-them-to-perform-some-ritual/ https://maarmik.in/breaking-news-3-girl-students-faint-in-hostel-superintendent-got-them-to-perform-some-ritual/#respond Sat, 22 Nov 2025 05:24:09 +0000 https://maarmik.in/?p=6071 Breaking News: कवर्धा जिले के रेंगाखार जंगल स्थित माध्यमिक और हाईस्कूल छात्रावास में शुक्रवार दोपहर फिर से गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई, जब करीब 12.30 बजे तीन छात्राएं अचानक चीखते हुए बेहोश होकर गिर पड़ीं। ये तीनों बालिका छात्रावास की रहवासी थीं। छात्राओं को तुरंत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां उनकी हालत रोने, हाथ-पैर […]

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Breaking News: कवर्धा जिले के रेंगाखार जंगल स्थित माध्यमिक और हाईस्कूल छात्रावास में शुक्रवार दोपहर फिर से गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई, जब करीब 12.30 बजे तीन छात्राएं अचानक चीखते हुए बेहोश होकर गिर पड़ीं। ये तीनों बालिका छात्रावास की रहवासी थीं। छात्राओं को तुरंत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां उनकी हालत रोने, हाथ-पैर कांपने और सिर पकड़कर चिल्लाने जैसी थी।

स्वास्थ्य केंद्र में मौजूद डॉक्टर ने कुछ मिनट स्थिति को समझने की कोशिश की, लेकिन अनुभव न होने के कारण वे वहां से चले गए। यह उनकी पहली पोस्टिंग बताई जा रही है और ऐसी परिस्थितियों से निपटने का उन्हें कोई पूर्व अनुभव नहीं था।

अधीक्षिका ने बुलाया बैगा, अस्पताल में दो घंटे चला टोटका

छात्रावास की अधीक्षिका राधिका खुसरे मौके पर पहुंचीं और उन्होंने बीमारी को भूत-प्रेत का असर बताते हुए एक कथित बैगा को बुला लिया। बैगा अस्पताल परिसर के एक कोने में बैठकर पहले टोटका और फिर छात्राओं पर झाड़फूंक करता रहा। लगभग दो घंटे तक यह प्रक्रिया चलती रही, लेकिन छात्राओं की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ बीएमओ बोड़ला, डॉ. पुरुषोत्तम राजपूत ने कहा कि अस्पताल में इस तरह का व्यवहार अनुचित है और वे इस मामले में जानकारी लेकर कार्रवाई करेंगे।

अभिभावक बेटियों को घर ले गए, छात्राओं में भय का माहौल

टोटका चलने की जानकारी लगने पर अभिभावक अस्पताल पहुंचे और अपनी बेटियों को घर ले गए। लगातार हो रही ऐसी घटनाओं के कारण छात्रावास और स्कूल की अन्य छात्राओं में भय का माहौल बन गया है।

पांच दिन में तीसरी घटना, अधीक्षिका फिर दे रही भूत-प्रेत का तर्क

बीते 5 दिनों में यह तीसरी घटना है। 15–16 नवंबर को भी 8–10 छात्राएं बेहोश हो गई थीं। तब भी अधीक्षिका ने इसे भूत-प्रेत की बाधा बताते हुए छात्राओं को उनके घर भेज दिया था। स्कूल परिसर में भी इसी तरह की 2–3 घटनाएं पहले हो चुकी हैं। अधीक्षिका राधिका खुसरे का दावा है कि वह झाड़फूंक जानती हैं और कई मामलों में ऐसा करके लोगों को ठीक कर चुकी हैं।

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Bilaspur High Court: ‘ये क्या मजाक है?’ बच्चों के भविष्य से खिलवाड़, जानिए पूरा मामला https://maarmik.in/bilaspur-high-court-what-kind-of-joke-is-this/ https://maarmik.in/bilaspur-high-court-what-kind-of-joke-is-this/#respond Fri, 03 Oct 2025 16:26:51 +0000 https://maarmik.in/?p=4581 बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर हाईकोर्ट ने राज्य में 12 वर्षों से बिना मान्यता के संचालित हो रहे प्री-प्राइमरी स्कूलों को लेकर सख्त नाराजगी जताई है। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बच्चों के भविष्य से इस तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मामले की सुनवाई के दौरान जब […]

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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर हाईकोर्ट ने राज्य में 12 वर्षों से बिना मान्यता के संचालित हो रहे प्री-प्राइमरी स्कूलों को लेकर सख्त नाराजगी जताई है। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बच्चों के भविष्य से इस तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

मामले की सुनवाई के दौरान जब शिक्षा विभाग की ओर से शपथ पत्र में यह बताया गया कि 2013 में लागू हुए नियमों को निरस्त करने का प्रस्ताव है, तो कोर्ट ने तल्ख लहजे में कहा – “बदलाव की तारीख के बाद से ही नया नियम लागू होगा, पुराने अपराध माफ नहीं होंगे।”

कोर्ट ने क्या कहा:

  • “12 साल स्कूल बिना मान्यता के कैसे चल गए? ये क्या मजाक है?”

  • “जब हमने संज्ञान लिया और सुनवाई शुरू की, तब जाकर सरकार को 2013 के नियम याद आए?”

  • “जो लोग बिना अनुमति स्कूल चला रहे थे, उन्होंने माता-पिता और बच्चों के साथ धोखा किया है।”

सरकार पर सवाल:

मुख्य न्यायाधीश ने कमेटी रिपोर्ट पर भी नाराजगी जताई, जिसमें सिर्फ दो दिनों में 12 साल पुराने कानून को बदलने की सिफारिश कर दी गई। उन्होंने कहा कि यह सरकार का पॉलिसी भ्रम और बड़े स्कूल संचालकों को बचाने की कोशिश है।

संभावित कार्रवाई:

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 2013 से पहले से संचालित सभी नर्सरी स्कूलों को मान्यता लेनी थी, और जो बिना अनुमति चलाए गए, उन पर कार्रवाई की जानी चाहिए।
कोर्ट ने कहा कि बिना अनुमति स्कूल चलाना अपराध है, और इसमें क्रिमिनल केस भी बन सकता है।

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