Financial Nomination Archives - Maarmik.in https://maarmik.in/tag/financial-nomination/ खबरों का नया दृष्टिकोण Sun, 30 Nov 2025 04:10:18 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9 https://maarmik.in/wp-content/uploads/2025/06/cropped-m-logo-scaled-1-32x32.png Financial Nomination Archives - Maarmik.in https://maarmik.in/tag/financial-nomination/ 32 32 Chhattisgarh High Court : बिलासपुर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला….. https://maarmik.in/chhattisgarh-high-court/ https://maarmik.in/chhattisgarh-high-court/#respond Sun, 30 Nov 2025 04:10:18 +0000 https://maarmik.in/?p=6262 Chhattisgarh High Court : रायपुर/ बिलासपुर। बैंक जमा राशि के मालिकाना हक और नॉमिनी (नामांकन) की भूमिका को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक दूरगामी और स्पष्ट फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि बैंक में किसी को नॉमिनी बनाने से उसे जमा राशि पर उत्तराधिकार का अधिकार नहीं मिल जाता; नॉमिनी […]

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Chhattisgarh High Court : रायपुर/ बिलासपुर। बैंक जमा राशि के मालिकाना हक और नॉमिनी (नामांकन) की भूमिका को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक दूरगामी और स्पष्ट फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि बैंक में किसी को नॉमिनी बनाने से उसे जमा राशि पर उत्तराधिकार का अधिकार नहीं मिल जाता; नॉमिनी कानूनी रूप से केवल उस राशि का ‘अभिरक्षक’ (Custodian) होता है, न कि मालिक। इस महत्त्वपूर्ण फैसले के साथ ही मुंगेली के एक चर्चित ससुर और दामाद के बीच चल रहे 15 लाख की जमा राशि के विवाद का अंत हो गया है।

Chhattisgarh High Court : दरअसल, यह विवाद बैंक ऑफ इंडिया की मुंगेली शाखा से जुड़ा था, जहां स्वास्थ्य कार्यकर्ता रंजनादेवी प्रधान के खाते में 15 लाख रुपए जमा थे। उनकी मृत्यु के बाद, दामाद राहुल ध्रुव और ससुर लल्लाराम दोनों ने इस रकम पर अपना दावा पेश किया। शुरुआती ट्रायल कोर्ट ने नामांकन को आधार बनाकर राशि दामाद को देने का आदेश दिया था।

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हालांकि, जब ससुर लल्लाराम ने अपील की, तो जिला न्यायालय ने हिंदू सक्सेशन एक्ट का हवाला देते हुए फैसला पलट दिया। जिला न्यायालय ने कहा कि मृतक के पति पक्ष के वारिसों का संपत्ति पर पहला अधिकार होता है, और ससुर लल्लाराम निकट संबंधी होने के नाते अधिकारी हैं।

मामला जब पुनरीक्षण याचिका के रूप में हाईकोर्ट पहुंचा, तो जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का संदर्भ देते हुए निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि, “नामांकन से व्यक्ति का सिर्फ ‘कस्टोडियन’ का दर्जा बनता है, इससे उत्तराधिकार का अधिकार नहीं मिलता। यह कानूनी स्थिति बार-बार स्पष्ट की जा चुकी है।” हाईकोर्ट ने अपीलीय अदालत का आदेश सही मानते हुए दामाद की याचिका को खारिज कर दिया, जिसके बाद 15 लाख की राशि पर लल्लाराम का अधिकार पक्का हो गया है। यह फैसला उत्तराधिकार कानून में नॉमिनी की वास्तविक कानूनी स्थिति को बल देता है।

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