Indian judiciary news Archives - Maarmik.in https://maarmik.in/tag/indian-judiciary-news/ खबरों का नया दृष्टिकोण Fri, 03 Oct 2025 16:28:36 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.1 https://maarmik.in/wp-content/uploads/2025/06/cropped-m-logo-scaled-1-32x32.png Indian judiciary news Archives - Maarmik.in https://maarmik.in/tag/indian-judiciary-news/ 32 32 मध्य प्रदेश की 5 बड़ी खबरें: पैरामेडिकल कॉलेजों को सुप्रीम कोर्ट से राहत, ऑनलाइन गेम की लत से मासूम की मौत, DSP ने किया आत्महत्या का प्रयास, CAG रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, रिश्वतखोरी पर EOW की कार्रवाई https://maarmik.in/5-big-news-of-madhya-pradesh-3/ https://maarmik.in/5-big-news-of-madhya-pradesh-3/#respond Fri, 03 Oct 2025 16:28:36 +0000 https://maarmik.in/?p=4512 पैरामेडिकल कॉलेजों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मध्यप्रदेश के पैरामेडिकल कॉलेजों को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत मिली है। हाईकोर्ट द्वारा लगाई गई मान्यता और प्रवेश प्रक्रिया पर रोक को सुप्रीम कोर्ट ने हटा दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार और पैरामेडिकल काउंसिल सहित संबंधित संस्थाओं को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। […]

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पैरामेडिकल कॉलेजों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत

मध्यप्रदेश के पैरामेडिकल कॉलेजों को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत मिली है। हाईकोर्ट द्वारा लगाई गई मान्यता और प्रवेश प्रक्रिया पर रोक को सुप्रीम कोर्ट ने हटा दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार और पैरामेडिकल काउंसिल सहित संबंधित संस्थाओं को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

ऑनलाइन गेम की लत ने ली मासूम की जान

देवास जिले में ऑनलाइन गेम फ्री फायर की लत ने एक 14 वर्षीय किशोर की जान ले ली। परिजनों द्वारा मोबाइल छीनने और गेम खेलने से मना करने पर नाराज होकर कक्षा 9वीं के छात्र ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। यह मामला बच्चों पर ऑनलाइन गेम्स के खतरनाक असर को उजागर करता है।

DSP ने किया आत्महत्या का प्रयास – हालत नाजुक

रतलाम जिले से बड़ी खबर आई है। जावरा की 24वीं बटालियन में तैनात DSP रामबाबू पाठक ने कथित तौर पर डिप्रेशन में 50 गोलियां खाकर आत्महत्या का प्रयास किया। उनकी हालत गंभीर है और उन्हें इंदौर रेफर किया गया है।

CAG रिपोर्ट में विधानसभा में बड़ा खुलासा

मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में पेश कैग (CAG) रिपोर्ट ने बड़ा खुलासा किया। रिपोर्ट में सामने आया कि जनकल्याण के बजट से अफसरों ने लक्ज़री गाड़ियां खरीदीं और कई विभागों में करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ।

EOW की बड़ी कार्रवाई – पंचायत सचिव रिश्वत लेते गिरफ्तार

इंदौर में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की। मगरखेड़ा जनपद पंचायत सचिव ओम गुप्ता को 10,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है।

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वेतन न मिलने पर हाईकोर्ट सख्त, शासन से मांगा जवाब https://maarmik.in/high-court-strict-on-non-payment-of-salary-sought-answer-from-government/ https://maarmik.in/high-court-strict-on-non-payment-of-salary-sought-answer-from-government/#respond Fri, 03 Oct 2025 16:28:20 +0000 https://maarmik.in/?p=4491 बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने मातृत्व अवकाश की अवधि का वेतन न मिलने पर शासन की उदासीनता को गंभीरता से लेते हुए कड़ा रुख अपनाया है। बुधवार को न्यायमूर्ति रविन्द्र कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने संविदा पर कार्यरत एक स्टाफ नर्स की अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए शासन से स्पष्ट जवाब तलब किया। न्यायालय […]

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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने मातृत्व अवकाश की अवधि का वेतन न मिलने पर शासन की उदासीनता को गंभीरता से लेते हुए कड़ा रुख अपनाया है। बुधवार को न्यायमूर्ति रविन्द्र कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने संविदा पर कार्यरत एक स्टाफ नर्स की अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए शासन से स्पष्ट जवाब तलब किया। न्यायालय ने नाराजगी जताते हुए पूछा कि पूर्व आदेश के बावजूद अब तक वेतन भुगतान क्यों नहीं किया गया।

मामले के अनुसार, याचिकाकर्ता जिला अस्पताल कबीरधाम में संविदा स्टाफ नर्स के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने 16 जनवरी 2024 से 16 जुलाई 2024 तक मातृत्व अवकाश लिया था, जो विधिवत स्वीकृत था। 21 जनवरी को उन्होंने कन्या संतान को जन्म दिया और 14 जुलाई को पुनः जॉइनिंग दी। इसके बावजूद कई बार आवेदन देने के बाद भी उन्हें अब तक मातृत्व अवकाश का वेतन नहीं मिला।

याचिकाकर्ता ने पूर्व में दायर रिट याचिका में यह मुद्दा उठाया था कि संविदा कर्मचारियों को भी छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (अवकाश) नियम 2010 के तहत मातृत्व अवकाश का वेतन मिलना चाहिए। 10 मार्च 2025 को हाईकोर्ट ने शासन को निर्देश दिया था कि तीन माह के भीतर वेतन भुगतान पर निर्णय लें। आदेश का पालन न होने और आर्थिक संकट बढ़ने पर याचिकाकर्ता ने अवमानना याचिका दायर की।

सुनवाई के दौरान न्यायालय ने शासन के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यह संवेदनशील मामला है, और आदेश की अवहेलना अस्वीकार्य है। न्यायालय ने शासन को तत्काल आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए और मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त 2025 को निर्धारित की।

यह मामला संविदा कर्मचारियों के अधिकारों की अनदेखी का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है। न्यायालय का कहना है कि मातृत्व अवकाश वेतन जैसे संवेदनशील विषय पर शासन की निष्क्रियता न केवल अवमानना है बल्कि मानवीय दृष्टि से भी अनुचित है। इस मामले ने एक बार फिर राज्य में संविदा कर्मचारियों के अधिकारों पर बहस छेड़ दी है।

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