judicial activism Archives - Maarmik.in https://maarmik.in/tag/judicial-activism/ खबरों का नया दृष्टिकोण Fri, 03 Oct 2025 16:28:20 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.1 https://maarmik.in/wp-content/uploads/2025/06/cropped-m-logo-scaled-1-32x32.png judicial activism Archives - Maarmik.in https://maarmik.in/tag/judicial-activism/ 32 32 वेतन न मिलने पर हाईकोर्ट सख्त, शासन से मांगा जवाब https://maarmik.in/high-court-strict-on-non-payment-of-salary-sought-answer-from-government/ https://maarmik.in/high-court-strict-on-non-payment-of-salary-sought-answer-from-government/#respond Fri, 03 Oct 2025 16:28:20 +0000 https://maarmik.in/?p=4491 बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने मातृत्व अवकाश की अवधि का वेतन न मिलने पर शासन की उदासीनता को गंभीरता से लेते हुए कड़ा रुख अपनाया है। बुधवार को न्यायमूर्ति रविन्द्र कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने संविदा पर कार्यरत एक स्टाफ नर्स की अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए शासन से स्पष्ट जवाब तलब किया। न्यायालय […]

The post वेतन न मिलने पर हाईकोर्ट सख्त, शासन से मांगा जवाब appeared first on Maarmik.in.

]]>
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने मातृत्व अवकाश की अवधि का वेतन न मिलने पर शासन की उदासीनता को गंभीरता से लेते हुए कड़ा रुख अपनाया है। बुधवार को न्यायमूर्ति रविन्द्र कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने संविदा पर कार्यरत एक स्टाफ नर्स की अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए शासन से स्पष्ट जवाब तलब किया। न्यायालय ने नाराजगी जताते हुए पूछा कि पूर्व आदेश के बावजूद अब तक वेतन भुगतान क्यों नहीं किया गया।

मामले के अनुसार, याचिकाकर्ता जिला अस्पताल कबीरधाम में संविदा स्टाफ नर्स के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने 16 जनवरी 2024 से 16 जुलाई 2024 तक मातृत्व अवकाश लिया था, जो विधिवत स्वीकृत था। 21 जनवरी को उन्होंने कन्या संतान को जन्म दिया और 14 जुलाई को पुनः जॉइनिंग दी। इसके बावजूद कई बार आवेदन देने के बाद भी उन्हें अब तक मातृत्व अवकाश का वेतन नहीं मिला।

याचिकाकर्ता ने पूर्व में दायर रिट याचिका में यह मुद्दा उठाया था कि संविदा कर्मचारियों को भी छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (अवकाश) नियम 2010 के तहत मातृत्व अवकाश का वेतन मिलना चाहिए। 10 मार्च 2025 को हाईकोर्ट ने शासन को निर्देश दिया था कि तीन माह के भीतर वेतन भुगतान पर निर्णय लें। आदेश का पालन न होने और आर्थिक संकट बढ़ने पर याचिकाकर्ता ने अवमानना याचिका दायर की।

सुनवाई के दौरान न्यायालय ने शासन के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यह संवेदनशील मामला है, और आदेश की अवहेलना अस्वीकार्य है। न्यायालय ने शासन को तत्काल आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए और मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त 2025 को निर्धारित की।

यह मामला संविदा कर्मचारियों के अधिकारों की अनदेखी का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है। न्यायालय का कहना है कि मातृत्व अवकाश वेतन जैसे संवेदनशील विषय पर शासन की निष्क्रियता न केवल अवमानना है बल्कि मानवीय दृष्टि से भी अनुचित है। इस मामले ने एक बार फिर राज्य में संविदा कर्मचारियों के अधिकारों पर बहस छेड़ दी है।

The post वेतन न मिलने पर हाईकोर्ट सख्त, शासन से मांगा जवाब appeared first on Maarmik.in.

]]>
https://maarmik.in/high-court-strict-on-non-payment-of-salary-sought-answer-from-government/feed/ 0
भूपेश बघेल की सुप्रीम कोर्ट में याचिका, ED की कार्रवाई को दी चुनौती https://maarmik.in/bhupesh-baghels-petition-in-the-supreme-court/ https://maarmik.in/bhupesh-baghels-petition-in-the-supreme-court/#respond Fri, 03 Oct 2025 16:28:03 +0000 https://maarmik.in/?p=4606 नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में 11 अगस्त को सुनवाई होगी। यह याचिका मनी लॉन्ड्रिंग अधिनियम (PMLA) 2002 की धारा 44, 50 और 63 के दुरुपयोग को लेकर दाखिल की गई है। भूपेश बघेल ने इस कार्रवाई को […]

The post भूपेश बघेल की सुप्रीम कोर्ट में याचिका, ED की कार्रवाई को दी चुनौती appeared first on Maarmik.in.

]]>
नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में 11 अगस्त को सुनवाई होगी। यह याचिका मनी लॉन्ड्रिंग अधिनियम (PMLA) 2002 की धारा 44, 50 और 63 के दुरुपयोग को लेकर दाखिल की गई है। भूपेश बघेल ने इस कार्रवाई को गैरकानूनी और एकतरफा बताते हुए अदालत से संरक्षण की मांग की है। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने बघेल की ओर से पक्ष रखा।

इस याचिका की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की विशेष पीठ कर रही है, जिसमें जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस उज्जल भूइयां और जस्टिस एनके सिंह शामिल हैं। अदालत ने सुनवाई को तीन चरणों में विभाजित किया है—प्राथमिक आपत्तियां, उनके जवाब और अंत में मामले के गुण-दोष की चर्चा। वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने आग्रह किया कि सुनवाई जल्द पूरी की जाए ताकि तय समय में फैसला आ सके।

भूपेश बघेल ने ED की प्रक्रिया पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि यह एजेंसी पुराने मामलों को खोलकर राजनीति से प्रेरित कार्रवाई कर रही है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों पर पहले से नॉन-बेलेबल वारंट जारी हैं, वे खुलेआम घूम रहे हैं और उन्हीं के बयानों के आधार पर उनके बेटे चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी हुई। उन्होंने यह भी कहा कि PMLA की धारा 50 के तहत किसी भी व्यक्ति से उसके खिलाफ ही बयान लेना न्याय सिद्धांतों का उल्लंघन है।

मामले की जड़ में छत्तीसगढ़ का शराब घोटाला है, जिसमें ईडी ने 2100 करोड़ रुपये के कथित भ्रष्टाचार का खुलासा किया है। ईडी के अनुसार इस घोटाले से सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा और चैतन्य बघेल को इसका मास्टरमाइंड बताया गया है। 18 जुलाई को ईडी ने उन्हें गिरफ्तार किया था और वे फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। चैतन्य ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की है, जिस पर जल्द सुनवाई संभावित है।

यह मामला राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील बन गया है। कांग्रेस इसे बदले की कार्रवाई बता रही है, जबकि भाजपा इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई बता रही है। अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से यह तय होगा कि ED की कार्रवाई संविधान और कानून के अनुरूप है या फिर इसमें न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता है।

 

The post भूपेश बघेल की सुप्रीम कोर्ट में याचिका, ED की कार्रवाई को दी चुनौती appeared first on Maarmik.in.

]]>
https://maarmik.in/bhupesh-baghels-petition-in-the-supreme-court/feed/ 0