Liquor syndicate Archives - Maarmik.in https://maarmik.in/tag/liquor-syndicate/ खबरों का नया दृष्टिकोण Wed, 26 Nov 2025 11:26:53 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.1 https://maarmik.in/wp-content/uploads/2025/06/cropped-m-logo-scaled-1-32x32.png Liquor syndicate Archives - Maarmik.in https://maarmik.in/tag/liquor-syndicate/ 32 32 CG Liquor Scam: शराब घोटाले में EOW की बड़ी कार्रवाई, पूर्व IAS निरंजन दास सहित 6 आरोपी नामजद https://maarmik.in/cg-liquor-scam-eow-takes-major-action-in-liquor-scam/ https://maarmik.in/cg-liquor-scam-eow-takes-major-action-in-liquor-scam/#respond Wed, 26 Nov 2025 11:26:53 +0000 https://maarmik.in/?p=6121 CG Liquor Scam: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 3200 करोड़ रुपये के शराब घोटाले मामले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने एक और बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने इस मामले में छठवां पूरक चालान कोर्ट में पेश किया है। यह चालान 6 आरोपियों के खिलाफ दाखिल किया गया है, जिनमें पूर्व IAS अधिकारी निरंजन […]

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CG Liquor Scam: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 3200 करोड़ रुपये के शराब घोटाले मामले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने एक और बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने इस मामले में छठवां पूरक चालान कोर्ट में पेश किया है। यह चालान 6 आरोपियों के खिलाफ दाखिल किया गया है, जिनमें पूर्व IAS अधिकारी निरंजन दास, नितेश पुरोहित, यश पुरोहित, मुकेश मनचंदा, अतुल सिंह और दीपेन चावड़ा शामिल हैं। EOW द्वारा दायर किए गए इस चालान में करीब 6300 पन्ने शामिल हैं।

जांच में सामने आए घोटाले के चौंकाने वाले खुलासे

EOW की जांच में खुलासा हुआ कि पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास ने कारोबारी अनवर ढेबर और कुछ अधिकारियों के साथ मिलकर एक प्रभावी नेटवर्क खड़ा किया था। आरोप है कि यह नेटवर्क हर महीने करीब 50 लाख रुपये अवैध कमाई कर रहा था। जांच एजेंसी ने बताया कि इस काली कमाई से लगभग 50 करोड़ रुपये की संपत्तियां खड़ी की गईं।

इसके अलावा, EOW ने दावा किया कि नोएडा की प्रिज्म होलोग्राफिक सिक्योरिटी फिल्म्स को टेंडर दिलाने में निरंजन दास की मुख्य भूमिका रही। कंपनी मानकों पर खरी नहीं उतरती थी, फिर भी उसे ठेका दिया गया और प्रत्येक होलोग्राम पर 8 पैसे कमीशन तय किया गया। इस कथित गड़बड़ी से राज्य को लगभग 1200 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

अवैध कमाई कैसे पहुंचती थी सिंडिकेट तक

EOW के अनुसार, अवैध कमाई का पूरा पैसा सिंडिकेट के मुख्य सदस्य अनवर ढेबर तक पहुंचता था। आयकर विभाग की जांच में सामने आया कि जनवरी 2019 से फरवरी 2020 के बीच रकम को रायपुर की जेल रोड स्थित गिरीराज होटल में रखा जाता था, जो यश और नितेश पुरोहित की स्वामित्व वाली संपत्ति है। इसी होटल से यह पैसा अधिकारियों, नेताओं और पार्टी फंड तक पहुंचाया जाता था। अनवर ढेबर का मैनेजर दीपेन चावड़ा इस गोपनीय लेनदेन की जिम्मेदारी संभालता था और रकम को आगे भिलाई तक पहुंचाता था, जहां लक्ष्मीनारायण बंसल उर्फ पप्पू और चैतन्य बघेल इसे मैनेज करते थे। निरंजन दास को भी इस अवैध कमाई में हिस्सेदारी मिलती थी, जिसके आधार पर उनके खिलाफ कार्रवाई की गई।

घोटाले की रकम बढ़कर 3200 करोड़ से भी अधिक

EOW की पिछली जांच में 2018 से 2023 के बीच अवैध शराब बिक्री से प्रदेश को लगभग 2174 करोड़ रुपये का नुकसान बताया गया था। लेकिन नए पूरक चालान में यह राशि बढ़कर 3200 करोड़ रुपये से भी अधिक बताई गई है। जांच में इस पैसे से संबंधित अधिकारियों और उनके रिश्तेदारों के नाम पर संपत्तियां खरीदने के सबूत भी सामने आए हैं।

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भूपेश बघेल की सुप्रीम कोर्ट में याचिका, ED की कार्रवाई को दी चुनौती https://maarmik.in/bhupesh-baghels-petition-in-the-supreme-court/ https://maarmik.in/bhupesh-baghels-petition-in-the-supreme-court/#respond Fri, 03 Oct 2025 16:28:03 +0000 https://maarmik.in/?p=4606 नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में 11 अगस्त को सुनवाई होगी। यह याचिका मनी लॉन्ड्रिंग अधिनियम (PMLA) 2002 की धारा 44, 50 और 63 के दुरुपयोग को लेकर दाखिल की गई है। भूपेश बघेल ने इस कार्रवाई को […]

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नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में 11 अगस्त को सुनवाई होगी। यह याचिका मनी लॉन्ड्रिंग अधिनियम (PMLA) 2002 की धारा 44, 50 और 63 के दुरुपयोग को लेकर दाखिल की गई है। भूपेश बघेल ने इस कार्रवाई को गैरकानूनी और एकतरफा बताते हुए अदालत से संरक्षण की मांग की है। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने बघेल की ओर से पक्ष रखा।

इस याचिका की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की विशेष पीठ कर रही है, जिसमें जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस उज्जल भूइयां और जस्टिस एनके सिंह शामिल हैं। अदालत ने सुनवाई को तीन चरणों में विभाजित किया है—प्राथमिक आपत्तियां, उनके जवाब और अंत में मामले के गुण-दोष की चर्चा। वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने आग्रह किया कि सुनवाई जल्द पूरी की जाए ताकि तय समय में फैसला आ सके।

भूपेश बघेल ने ED की प्रक्रिया पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि यह एजेंसी पुराने मामलों को खोलकर राजनीति से प्रेरित कार्रवाई कर रही है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों पर पहले से नॉन-बेलेबल वारंट जारी हैं, वे खुलेआम घूम रहे हैं और उन्हीं के बयानों के आधार पर उनके बेटे चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी हुई। उन्होंने यह भी कहा कि PMLA की धारा 50 के तहत किसी भी व्यक्ति से उसके खिलाफ ही बयान लेना न्याय सिद्धांतों का उल्लंघन है।

मामले की जड़ में छत्तीसगढ़ का शराब घोटाला है, जिसमें ईडी ने 2100 करोड़ रुपये के कथित भ्रष्टाचार का खुलासा किया है। ईडी के अनुसार इस घोटाले से सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा और चैतन्य बघेल को इसका मास्टरमाइंड बताया गया है। 18 जुलाई को ईडी ने उन्हें गिरफ्तार किया था और वे फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। चैतन्य ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की है, जिस पर जल्द सुनवाई संभावित है।

यह मामला राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील बन गया है। कांग्रेस इसे बदले की कार्रवाई बता रही है, जबकि भाजपा इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई बता रही है। अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से यह तय होगा कि ED की कार्रवाई संविधान और कानून के अनुरूप है या फिर इसमें न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता है।

 

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