रायपुर/दंतेवाड़ा। छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में आज हरेली अमावस्या के शुभ अवसर पर पाट जात्रा पूजा विधान के साथ विश्वप्रसिद्ध ऐतिहासिक बस्तर दशहरा पर्व का शुभारंभ हो गया। दंतेवाड़ा के मां दंतेश्वरी मंदिर प्रांगण में पारंपरिक मांझी-चालकी, पुजारी, पटेल, नाईक-पाईक सहित सेवादारों द्वारा रथ निर्माण की ठुरलू खोटला रस्म पूरी श्रद्धा से संपन्न की गई। इस अवसर पर बस्तर दशहरा समिति ने क्षेत्रीय नागरिकों एवं ग्रामीणों से अपील की कि वे पूजा विधान में शामिल होकर परंपरा और संस्कृति का हिस्सा बनें।
यह 75 दिवसीय पर्व पूरी तरह मां दंतेश्वरी को समर्पित है, जिसमें 05 सितंबर से लेकर 07 अक्टूबर तक विभिन्न अनुष्ठानों की श्रृंखला चलेगी। इसमें डेरी गड़ाई, काछनगादी, कलश स्थापना, नवरात्रि पूजन, रथ परिक्रमा, मुरिया दरबार, कुटुम्ब जात्रा और अंत में मावली माता की डोली विदाई जैसे महत्वपूर्ण पूजा विधान शामिल हैं। बस्तर दशहरा केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि जनजातीय परंपराओं, समरसता और छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक गर्व का प्रतीक बन गया है।

