Bilaspur News: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने विधानसभा और लोकसभा चुनाव के दौरान टेंट, लाइट, माइक और जनरेटर जैसी चुनावी सामग्री की आपूर्ति के बकाया भुगतान से जुड़े मामले में भारतीय निर्वाचन आयोग (EC) को राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कमर्शियल कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप से मना करते हुए आयोग की अपील खारिज कर दी।
मामले के अनुसार, वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव के दौरान कोंडागांव जिला मुख्यालय में मेसर्स नीलेश टेंट हाउस एंड लाइट डेकोरेशन, जगदलपुर को चुनावी व्यवस्थाओं के लिए टेंट, लाइट, माइक, जनरेटर और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने का कार्य सौंपा गया था। इसके बाद वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भी इसी फर्म को सामग्री आपूर्ति का वर्क ऑर्डर जारी किया गया।
फर्म ने दोनों चुनावों में उपलब्ध कराई गई सेवाओं के लिए क्रमशः करीब 48.33 लाख रुपये और 71.15 लाख रुपये के बिल प्रस्तुत किए। आरोप है कि लंबे समय तक भुगतान नहीं होने पर फर्म ने कमर्शियल कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
सुनवाई के बाद कमर्शियल कोर्ट ने फर्म के पक्ष में फैसला सुनाते हुए बकाया राशि का भुगतान करने के निर्देश दिए थे। इस आदेश को भारतीय निर्वाचन आयोग ने हाईकोर्ट में चुनौती दी, लेकिन हाईकोर्ट ने आयोग की दलीलों को स्वीकार नहीं किया।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि फर्म ने मांग के अनुरूप आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई थी। विशेष रूप से ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति की समस्या को देखते हुए जनरेटर, लाइट और अन्य उपकरण चुनावी प्रक्रिया को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए आवश्यक थे। ऐसे में कमर्शियल कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता।
हाईकोर्ट के इस फैसले के साथ ही निर्वाचन आयोग की अपील खारिज हो गई और कमर्शियल कोर्ट का आदेश बरकरार रखा गया।

